अनुसन्धान /रिसर्च
20 -09-2021
बलात्कार, समलेंगिक या लेज़बियन होने के कारण व् बचाव
(किसी भी आयु में)
-डॉ जे के शर्मा , चण्डीगढ़
9876042656
अति आवश्यक सुझाव :
- Ø आपकिसीभीधर्म, सम्प्रदाय व् जाति से सम्बन्ध रखते हों, आप अवश्य ही अपने बच्चों की जन्म कुंडली /होरोस्कोप स्वयम ही फ्री एप्प से बनाकर घर में रख लें |
- Ø उसमें आप स्वयम चेक कर सकते हैं कि शुक्र या गुरु या बुध जन्म से ही नीच या वक्री या अस्त तो नहीं ?? मंगल या चन्द्र नीच तो नहीं ?? शनि नीच या वक्री तो नहीं ??
- Ø यदि इनमें कोई एक भी नीच या वक्री या अस्त हो तो कृपया योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें जिससे कि आपके बच्चे के साथ उपरोक्त विषय से सम्बन्धित अमानवीय व् अकल्पनीय घटना ना घटे |
- Ø जिनकी जन्म पत्री या जन्म की तारिख भी नहीं पता, उनके बारे में चालित-गोचर के ग्रह ही अच्छे बुरे के बारे में बताया जा सकता है |
- Ø घोर कलियुग में, बूढी स्त्रियों, नाबालिग कन्याओं व् छोटे बच्चों के साथ सेक्सुअल कु-कृत्य आदि होने के कारण यह लेख लिखा गया है |
इस लेख का उदेश्य :
प्रिय पाठको, युगों युगों से विलासिता सामाजिक जीवन का अंग रही है व् रहेगी भी क्योंकि हर पुरुष व् स्त्री की शारीरिक भूख समयानुसार पूरी होती रहती है | परन्तु, अब हर दिन छेड़ने की, बलात्कार करने की, गे या लेज़बियन बनने तथा हीजड़ा बनने की घटनाएँ आम होती जा रही हैं | क्या आज के मेडिकल साइंस के जमाने में हीजडे जन्म लेते हैं ??
यह सब घटनाएँ युगों युगों से चली आ रही हैं - हर देश में - शहर हो या गाँव – हर जगह यह सब होता है - बस, कहीं ये बात दबा दी जाती है तो कहीं कलई खुल जाती है |
विवाह होना, स्त्री पुरुष की मित्रता होना, दो पुरुष मित्रों या स्त्री मित्रों का मन मिलना- मित्रता होना, लव अफेयर्स होना, विवाह से पहले सेक्स करना या बलात्कार करना, किसी का गे बनना, किसी का लेज़बियन बनना, लिव-इन रिलेशनशिप में रहना (व् उस से सन्तान होना) आदि आदि सब कुछ किसी भी व्यक्ति (स्त्री/पुरुष) की जन्म पत्री में एक सही ज्योतिषी को स्पष्ट दिख जाता है | जन्म पत्री पहले ही संकेत दे देती है कि अमुक स्त्री या पुरुष का डाइवोर्स आदि तो नहीं है भविष्य में |
- Ø इस लेख लिखने का एक कारण तो यह है ही कि जागरूक माता पिता अपने बच्चों की जन्म कुंडली दिखाते हुए उपरोक्त विषय सम्बन्धित प्रश्न भी करें
- Ø टीन-ऐज ( 12 से 19-21वर्ष तक भी ) में बच्चा कहीं उपरोक्त विषय सम्बन्धी समस्याओं या क्रिया कलापों से तो नहीं गुज़र रहा है या गुजरने वाला है, यह जन्म कुंडली बता देती है |
- किसी लडके के साथ अप्राकृतिक यौन या लडकी के साथ अनाचार बलात्कार आदि तो नहीं होने जा रहा, यह जन्म पत्री से विद्वजन देख कर बता सकते हैं |
- Ø घोर कलियुग में, बूढी स्त्रियों व् छोटे बच्चों के साथ सेक्सुअल कु-कृत्य आदि होने के कारण यह लेख लिखा गया है |
अत:, पाठक गण स्वयम व् दूसरों को भी इस विषय पर जागृत करें जिससे समय रहते बचाव हो जाए |
ü इसलेखसे जागरूक अभिभावकों को लाभ होगा कि वे अपने बच्चों की रक्षा व् सुरक्षा का पूरा ध्यान रख सकेंगे | विद्वान् ज्योतिषियों का यह उत्तरदायित्व बनता है कि वे इस विषय के कारण जान कर समाज का सही मार्गदर्शन करें | मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ साथ सम्बन्धित कारणों के निदान के लिए उचित समाधान प्रस्तुत करें | ग्रहों को नकारात्मक से सकारात्मक, आध्यात्मिक व् धार्मिक उपाय कर के ऐसी दूषित स्थिति को टालने का प्रयत्न कराएँ |
कारण :
- लव अफेयर्स होना, विवाह से पहले सेक्स करना या बलात्कार करना, विवाहेत्तर (विवाह के बाद अन्य पुरुष/स्त्री से सम्बन्ध बन जाना), किसी का गे बनना, किसी का लेज़बियन बनना, लिव-इन रिलेशनशिप में रहना आदि जन्म कुंडली में स्पष्ट दिखते हैं |
- किसी भी छोटे बच्चे लड़के/लड़की के साथ जबरदस्ती होना भी कुंडली में दिखता है |
- जब भी शनि चन्द्र राशि से पहली राशी व् तदोपरांत शनि जन्म राशी पर (चन्द्र राशी) पर आता है तो लव अफेयर्स, विवाह, विवाह पूर्व सेक्स आदि का समय हो जाता है |
- यदि जातक अभी छोटा बच्चा (लड़का /लड़की) हो तो उस पर भी इस विषय-विलासिता का थोड़ा बहुत प्रभाव पड़ता है, उसकी कुंडली में यदि अन्य ग्रह खराब हों तो जबरदस्ती शारीरिक उत्पीड़न भी होता है |
- दुर्भाग्य वश, बुढ़ापे में भी स्त्री या पुरुष का ऐसा उत्पीड़न कुंडली में दिख जाता है |
- जन्म कुंडली में शुक्र किसी भी घर में नीच (कन्या राशि में) या वक्री हो तो व्यक्ति को शैया सुख/सेक्स सुख में कमी रहती है |
- जन्म कुंडली में शुक्र किसी भी घर में नीच (कन्या राशि में) या वक्री हो तो व्यक्ति को उसकी पत्नी /पति/सन्तान/परिवार/बॉस/समाज व् संसार से कभी भी पूरी मान प्रतीष्ठा आदि नहीं मिलते |
उपरोक्त समस्याओं के ज्योतिषीय कारण निम्न हैं :
लगन : कुंडली का पहला घर :
कुंडली का पहला घर : लग्न में : गुरु वक्री + केतु/ शुक्र नीच+चन्द्र /शुक्र नीच +गुरु (या गुरु वक्री)/ शुक्र नीच+ बुध (या बुध वक्री)/ शुक्र नीच+ शनि (या शनि वक्री) – किसी भी आयु में बलात्कार होने का संकेत देते हैं |
कुंडली का दूसरा घर : यहाँ बुध नीच (मीन राशि) + शुक्र नीच (कन्या राशि ) कुंडली में कहीं भी /गुरु नीच (मकर राशि) कुंडली में कहीं भी होने पर जातक को दुर्बुद्धि कर देते हैं व् वह इन क्रिया कलापों में लिप्त होने लगता है |
कुंडली का तीसरा घर : बुध नीच / मंगल कर्क का नीच/ वक्री गुरु + केतु/ शुक्र नीच+चन्द्र /शुक्र नीच +गुरु (या गुरु वक्री)/ शुक्र नीच+ बुध (या बुध वक्री)/ शुक्र नीच+ शनि (या शनि वक्री) जातक के पराक्रम को कमजोर कर देते हैं व् वह दूसरे के बल के आगे समर्पण कर देता है | ऐसे में, कोई भी उसका शोषण करता है |
कुंडली का चौथा घर : चन्द्र के घर में कोई भी ग्रह नीच हो, चन्द्र कम डिग्री का हो व् नीच (वृश्चिक) का हो तो जातक भावुक व् कमजोर होकर, ना चाहते हुए भी दूसरे को भावनाओं का सहयोग देने के लिए शोषित हो जाता है |
कुंडली का पांचवां घर : (पांचवें घर या ग्याहरवें घर में – दोनों में निम्न ग्रह होने पर इस विषय-सम्बन्धी स्थितिया बन सकती हैं |)
(क) पांचवें घर में चन्द्र हो, (ख) पांचवें घर में चन्द्र अस्त हो, (ग) पांचवें घर चन्द्र नीच वृश्चिक का हो व् मंगल नीच या अस्त या वक्री हो,(घ) पांचवें घर में मंगल अस्त नीच या वक्री हो |
पांचवें घर में बुध की राशि मिथुन या कन्या हो तथा परन्तु कुंडली में बुध कहीं भी जन्म से अस्त नीच या वक्री हो |
पांचवें घर में गुरु की राशि धनु या मीन हो परन्तु कुंडली में गुरु कहीं भी जन्म से अस्त नीच या वक्री हो |
पांचवें घर में गुरु वक्री व् केतु बैठे हों तो, गे / लेज़बियन होने का संकेत है | ग्याहरवें घर में ये हों तो भी ऐसी सम्भवनायें बनती हैं |
पांचवें घर में शुक्र हो या शुक्र की राशि वृष या तुला हो तथा परन्तु शुक्र कुंडली में कहीं भी जन्म से अस्त नीच या वक्री हो |
पांचवें घर में शनि हो या शनि की राशि मकर या कुम्भ हो तथा परन्तु शनि कुंडली में कहीं भी जन्म से अस्त नीच या वक्री हो |
पांचवें घर में राहू नीच राशी धनु में हो व् परन्तु कुंडली में कहीं भी गुरु अस्त या नीच या वक्री हो |
पांचवें घर में केतु नीच राशि मिथुन में हो व् परन्तु कुंडली में कहीं भी बुध अस्त या नीच या वक्री हो |
पांचवें घर पर गोचर में (जन्म समय से नीच या वक्री) शनि चल रहा हो व् वहां जन्म से बुध, गुरु या शुक्र नीच, वक्री या अस्त बैठे हों |
इस घर में गुरु वक्री + केतु , शुक्र नीच+चन्द्र /शुक्र नीच +गुरु (या गुरु वक्री)/ शुक्र नीच+ बुध (या बुध वक्री)/ शुक्र नीच+ शनि (या शनि वक्री) – किसी भी आयु में बलात्कार होने का संकेत देते हैं |
कुंडली का छटा घर :
छ्टे घर में, जन्म से नीच या वक्री (व् अस्त भी) बुध या गुरु या शुक्र या ये तीनों होने पर यह स्थिति बनती है | इस घर में नीच चन्द्र, नीच मंगल होने पर भी ऐसा होगा ही | गोचर – चलित का शनि आकर तो ऐसा अवश्य करा देता है |
इस घर में जन्म से गुरु मार्गी हो व् चलित का शनि बाहरवें घर में हो या इसी छ्टे घर में चलित में आये तो जातक अनैतिक सम्बन्ध बना लेता है |
कुंडली का सातवाँ घर :
पापी ग्रह नीच या वक्री अवस्था में हो और लगन कमजोर हो या लग्न का स्वामी भी दूषित हो और पतित ग्रह से दृष्ट हो तो बलात्कार या यौन शोषण होता है |
सातवें घर में बुध व् शुक्र बैठे हों ( या बुध, शुक्र, शनि तीनों बैठे हों – मार्गी हों तो भी, इनमें कोई भी अस्त वक्री या नीच हो तब भी ) व् चलित का शनि /वक्री शनि क्रॉस कर रहा हो तो कई स्त्री/पुरुषों के शारीरिक सम्पर्क में जातक आता/आती है |
इस घर में सूर्य मेष राशी का /नीच+शत्रु राशि तुला का / शत्रु राशी वृष का/ स्वराशी सिंह का होने पर, सम्बन्ध बनाने के बाद सूर्य सम्बन्ध विच्छेद करा देता है, दूसरे विवाह के योग भी बन जाते हैं |
कुंडली का आठवां घर :
आठवें घर में जब शनि या चलित-गोचर का शनि भ्रमण कर रहा हो, तथाइस घर में चन्द्र नीच राशी वृश्चिक में हो व् मंगल भी कुंडली में जन्म से कमजोर/नीच/अस्त/वक्री हो तब ऐसी स्थितियां बनती हैं |
इसी प्रकार, शनि या चलित-गोचर का शनि भ्रमण कर रहा हो तथा यहाँ कर्क का मंगल जन्म से कमजोर/नीच/अस्त/वक्री हो तब ऐसी स्थितियां बनती हैं |
यदि अष्टम भाव में स्त्री राशि हो और उसमें स्त्री ग्रह वक्री /अस्त/नीच हो और साथ में राहू या शनि की दृष्टि हो तो समलेंगिक (गे /लेस्बियन ) सम्बन्ध बनते हैं |
कुंडली का नौवां घर :
गुरु वक्री+केतु समलेंगिक रिश्ते बनता है | गुरु वक्री ग्याहरवें व् केतु पांचवें या केतु ग्यारहवें व् गुरु वक्री पांचवें होने पर भी समलेंगिक रिश्ते बनते हैं |
शुक्र नीच /गुरु नीच /बुध नीच /चन्द्र नीच की विंशोत्तरी दशा शुरू होने पर उसी ग्रह में उसी के अंतर में यह स्थिति उपस्थित होगी, चाहे किसी अन्य को पता लगा या ना लगे | सम्भवत, कलंक भी लगेगा |
कुंडली का दसवां घर :
चन्द्र नीच/मंगल नीच / बुध नीच /गुरु नीच / शुक्र नीच की विंशोत्तरी दशा शुरू होने पर उसी ग्रह में उसी के अंतर में यह स्थिति उपस्थित होगी,चाहे किसी अन्य को पता लगा या ना लगे | शुक्र नीच के समय में सम्भवत कलंक भी लगेगा या कलंक उपरांत विवाह सम्बन्ध टूट जायेगा | विवाह हो चुका होने पर, इन नीच ग्रहों से किसी की भी विंशोत्तरी दशा में पूर्ण सुख संतोष प्रसन्नता व् सफलता नही मिलती |
कुंडली का ग्यारवाँ घर : (पांचवें घर या ग्याहरवें घर में – दोनों में निम्न ग्रह होने प इस विषय-सम्बन्धी स्थितियां बन सकती हैं |)
गुरु वक्री + केतु , शुक्र नीच+चन्द्र /शुक्र नीच +गुरु (या गुरु वक्री)/ शुक्र नीच+ बुध (या बुध वक्री)/ शुक्र नीच+ शनि (या शनि वक्री) – किसी भी आयु में बलात्कार होने का संकेत देते हैं |
कुंडली का बारहवाँ घर :
इस घर में : गुरु वक्री + केतु , शुक्र नीच+चन्द्र /शुक्र नीच +गुरु (या गुरु वक्री)/ शुक्र नीच+ बुध (या बुध वक्री)/ शुक्र नीच+ शनि (या शनि वक्री) – इस घर में होने से ये ग्रह व्यक्ति की मानसिकता को कमजोर कर देते हैं, व्यक्ति आत्मसमर्पण कर बैठता है व् यह समस्या आ जाती है | इस ग्रह दशा से किसी भी आयु में, नकारात्मक ग्रहों का योग होने पर, बलात्कार सम्भव होता है |
इसी घर में : शुक्र नीच /गुरु नीच /बुध नीच /चन्द्र नीच की विंशोत्तरी दशा शुरू होने पर उसी ग्रह में उसी के अंतर में या नकारात्मक ग्रह के जुड़ने से यह स्थिति बन जाती है, चाहे अन्य लोगों /व्यक्ति को पता लगा या ना लगे |
निम्न ग्रह कहीं भी हों :
चलित-गोचर के शनि/वक्री शनि के चलते समय, जब :
चन्द्र+ केतु हो तथा शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
सूर्य नीच+केतु हो तथा शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
मंगल नीच या अस्त या वक्री होने पर व् शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
शुक्र अपने ही घर में जन्म से नीच (कन्या में) या अस्त या वक्री होने पर / शुक्र की राशी वृष या तुला सातवें घर में तथा शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
बुध नीच या अस्त या वक्री होने पर (विशेषकर सातवें घर में होने पर) + व् शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
गुरु (नीच, अस्त या वक्री होने पर) तथा शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
राहू वृष या तुला राशी में हो तथा शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
केतु मिथुन या कन्या राशी में हो तथा शुक्र कुंडली में कहीं भी नीच वक्री या अस्त होने पर
मंगल कुंडली में जन्म से कमजोर/नीच/अस्त/वक्री हो व् शनि/वक्री शनि यहाँ (नीच/वक्री या अस्त मंगल को) क्रॉस कर रहा हो
गुरु या बुध या शुक्र जन्म से नीच अस्त या या वक्री हों व् यहाँ शनि /वक्री-शनि गोचर में चल रहा हो
शुक्र नीच /गुरु नीच /बुध नीच /चन्द्र नीच की विंशोत्तरी दशा शुरू होने पर उसी ग्रह में उसी के अंतर में यह स्थिति उपस्थित होगी, चाहे किसी अन्य व्यक्ति को पता लगा या ना लगे | कलंक लगने व् सम्बन्ध विच्छेद होने के स्थिति आ सकती है |
बचाव के उपाय :
ü मेडिकलट्रीटमेंटसेसहायतालें |
ü इस विषय सम्बन्धी समस्याओं का ज्योतिषीय उपाय (1) कुंडली देखने के उपरांत ही सम्भव है (2) समस्या पैदा करने वाले ग्रह की शांति व् उपाय जरूरी होंगे |
ü (3) समाधान तुरंत ना होकर, समय लेगा |
ü कुंडली अनुसार, सूर्य , मंगल व् अन्य सहायक ग्रहों को स्ट्रोंग कर के जातक को दुर्घटना से पहले बचाया जा सकता है |
ü गे / लेसबियन लड़के लडकियों को इससे बचाने में थोड़ा समय अवश्य लगता है |
यदि आप (1) अपनी समस्या व्यक्तिगत रूप से पूछना चाहते हों (2) आप अपना या अपने व्यवसाय का मासिक व्/या वार्षिक फल लिखित में मंगाना चाहते हों (3) जन्म से सारी उम्र का लिखित फलादेश, विशेष वर्षों में लाभ हानि आदि व् हर स्थिति के लिए उपायों सहित बनवाना चाहते हों तो आप व्हट्स एप्प 9876042656 पर अपना विवरण (नाम, जन्म की तारीख, समय व् स्थान जिला) व् प्रश्न भेजें जिनका उत्तर आपको प्राप्त होगा, बताये गये मानदेय देने के बाद |
इस लेख सम्बन्धी आपके सुझाव या आलोचना आदि का स्वागत रहेगा | ज्योतिष का ज्ञान रखने वाले विद्वान उपरोक्त लेख में कमियां लिखें तो मैं अपने ज्ञान वृद्धि के लिए उनका धन्यवादी होऊंगा | आलोचना करते हुए अपना तर्क अवश्य दें | केवल आलोचना के लिए आलोचना की आवश्यकता नहीं है | अकारण या नास्तिक होने पर अज्ञानी की तरह टिप्पणी करने से क्या लाभ ? आपके सुझाव आदि का स्वागत है 9876042656 पर |
(नोट : इस लेख के लिए प्रेरित करने के लिए ज्योतिष विदुषी डॉ ऋचा श्रीवास्तव बालाघाट (एम् पी) का विशेष धन्यवाद | ज्योतिषी श्री वीरेंदर राणा चंडीगढ़ व् ज्योतिषी श्री दिनेश जिज्ञासु मोहाली पंजाब ने उपरोक्त लेख में विभिन्न योगों की चर्चा की व् लिखित में सुझाए जिससे यह लेख पूर्ण हो पाया, आप दोनों का धन्यवाद |)
शुभकामनाएं | जय श्री लक्ष्मी नारायण |