मारक ग्रह
(यह लेख आपकी जन्म कुंडली के पहले घर लग्न में लिखी (राशि) पर आधारित है, आपकी जन्म राशि या नाम राशि पर आधारित नहीं )
जीवन है तो मृत्यु है और मृत्यु है तो जीवन या पुनर्जन्म है, यही सनातन सत्य है जो झुठलाया नहीं जा सकता | जन्म लेते ही, संसार भर में हर जीव का जन्म लग्न निश्चित हो जाता है | जन्म लगन अलग बात होती है, जन्म राशि अलग बात होती है व् आपकी प्रसिद्ध नाम राशि अलग बात होती है | जन्म के साथ ही व्यक्ति के अंतिम दिन का संकेत भी जन्म कुंडली में विद्वान ज्योतिषी देख लेते हैं, बताते नहीं | ज्योतिष में कटु सत्य या मृत्यु का समय बताना आदि वर्जित है | जितना जीवन निश्चित है, उसमे कोई कम ज्यादा नहीं हो सकता, मात्र कष्ट-चोट-दुःख-दर्द से उचित बचाव जरुर मिल सकता है | अपनी मेहनत, आत्म विश्वास, आत्म बल, शारीरिक हिम्मत व् पूर्ण निष्ठा होने पर व्यक्ति भाग्य को भी थोड़ा बदल सकता है | प्रकृति व् निराकार ईश्वर व्यक्ति की लग्न तथा भक्ति को देख कर व्यक्ति को असफलताओं से सफलताएँ देने लगते हैं | ज्योतिषीय सलाह व् सुझावों से उपाय करके आत्म विश्वास बढ़ता है व् सफलता प्राप्त की जा सकती है |
जरूरी नहीं कि मृत्यु उपरांत उसी देश व् उसी शहर में पुनर्जन्म हो | पति पत्नी के रिश्ते में भी छ-सात जन्मों के बाद पत्नी पति का बन जाता है व् पत्नी पति बन जाती है, यदि वे मानव रूप में लगातार आ रहे हों | सभी धर्मों के लोग अपने लिए सुख, स्वास्थ्य, धन, स्मृद्धि आदि के लिए अपने अपने उपाय करते हैं | सनातन धर्म में प्राय सभी लोग किसी देवता या ग्रह की पूजा आदि करते हैं व् सुख स्वास्थ्य धन स्मृद्धि आदि के लिए प्रार्थना करते हैं | हर हिन्दू, देवी देवताओं के अतिरिक्त सभी नवग्रहों की पूजा करता है | एक अन्य लेख में मैंने लिखा था कि ग्रह न मित्र होते हैं न शत्रु, वे केवल ईश्वर द्वारा दिया हुआ अपना कर्तव्य पूरा करते हैं |
व्यक्ति को यह पता नहीं होता कि वह जिस ग्रह की पूजा या उपाय आदि कर रहा है वह ग्रह उसके लिए मारक ग्रह भी होगा अर्थात वही ग्रह अभी चाहे लाभ दे दे परन्तु अन्तत उसका अंत भी वही करेगा !
नीचे की तालिका में प्रत्येक लग्न का प्रथम व् दूसरा मारक लिखा जा रहा है | लग्न की राशि मेष से मीन तक जो भी हो, उसे मारक ग्रह यहाँ स्पष्ट हैं |
हो सकता हैं कि आपका नाम लग्न की राशि का हो व् यह जरूरी भी नहीं है | अत अपनी जन्म राशि व्/या प्रसिद्ध नाम राशि चेक कर लें या करा लें |
जन्म लग्न लग्न स्वामी ग्रह प्रथम मारक दूसरा मारक
मेष मंगल मंगल बुध
वृष शुक्र बृहस्पति मंगल
मिथुन बुध बृहस्पति चन्द्र
कर्क चन्द्र शनि सूर्य
सिंह सूर्य बुध बृहस्पति
कन्या बुध बृहस्पति मंगल
तुला शुक्र शुक्र मंगल
वृश्चिक मंगल शुक्र बृहस्पति
धनु बृहस्पति बुध शनि
मकर शनि चन्द्र सूर्य
कुम्भ शनि बृहस्पति बुध
मीन बृहस्पति बुध मंगल
इसका मतलब यह नहीं कि अब हम मारक ग्रह की पूजा दान उपाय आदि बंद कर दें | इससे कोई लाभ नहीं होने वाला | ग्रहों ने बिना लिहाज़ किये बिना मित्रता निभाए अपना काम करते जाना है | चाहे ग्रह मारक ही क्यों न हो, अपने निश्चित लाभकारी वर्ष में ग्रह ने (अस्त व् वक्री न होने पर ) उचित या अधिक लाभ देना ही देना है | जब ईश्वर की पूजा करके हर रोज़ हम अपने शुभ कर्मों के खाते में कुछ शुभ परोपकारी कर्म जोड़ते हैं, उनका ब्याज सहित लाभ ईश्वर इसी जन्म में दे देता है कष्ट व् दुर्घटना आदि के समय बचाव या शीघ्र बचाव करके | मृत्यु निश्चित हो तो उसका तो उपाय नहीं होता, परन्तु दुखों व् कष्टों से उपायों से सचमुच लाभ हुए हैं | क्लाइंट्स के वर्षों के अनुभव जो साँझा किये जाते रहे हैं, उनके आधार पर यह लिखा जा रहा है |
नव ग्रह पूजा का विधान इसी लिये है कि कष्ट देने वाले ग्रह को शांत करने का प्रयास किया जाये व् अन्य ग्रहों से सहयोग लिया जाये | यह तब सम्भव है जब व्यक्ति में नैतिकता, जीवन मूल्य, अच्छा व्यवहार व् उस अदृश्य शक्ति के प्रति विश्वास हो, चाहे उस शक्ति को आप ईश्वर, भगवान, वाहेगुरु, अल्लाह, जीसस या कोई भी नाम दें | धर्म के ठप्पे तो बच्चे के जन्म होने पर यहाँ संसार में ही लगाये जाते हैं जैसा कि फिल्म पी के में दिखाया गया है |
कई विद्वान् अपनी मृत्यु का समय जान लेते हैं ग्रहों की गति व् मारक ग्रहों का ज्ञान होने से |
आप पाठक इस लेख को एक सूचना या जानकारी की दृष्टि से पढ़े व् समझें | आप चाहे तो मारक ग्रहों की शांति के यथोचित उपाय करते रहें जिससे कि इस संसार से जाने में कष्ट न हो व् शांत हो मुस्कराते हुए अगली यात्रा पर निकल जाएँ | आपका कल्याण हो |
नारायण ! नारायण !!
मारक ग्रह
(यह लेख आपकी जन्म कुंडली के पहले घर लग्न में लिखी (राशि) पर आधारित है, आपकी जन्म राशि या नाम राशि पर आधारित नहीं )
इसके लिए आप देखें : www.panditjksharma.com OR Astrologer J K Sharma