ग्रहों की गति, अस्तता व् वक्रता
Motion, Combustion and Retrogression of Planets
विज्ञान की तर्ज़ पर नव ग्रहों की गति, इनका अस्त होना व् इनका वक्र होना – सब कुछ वैज्ञानिक है | भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) में आप इन ग्रहों का विवरण पाएंगे |
कोई भी व्यक्ति ग्रहों को तो मान लेता है परन्तु इनके अस्त व् वक्री होने के कारण आदि नहीं जानता | पाठकों व् ज्योतिष के नये विद्यार्थीयों को यह जानकारी यहाँ दी जा रही है |
उपर आसमां में ग्रह एक ओवल आकार पर चल रहे होते हैं | सभी ग्रह सूर्य की ओर जाने का प्रयास करते रहते हैं | भौतिक शास्त्र फिजिक्स अनुसार सूर्य एक जगह स्थिर है | तारे सितारे राशियाँ घूमती हुई सूर्य के पास पहुँचते जाते हैं | सूर्य हर एक राशि में एक माह रहता है | पश्चिमी ज्योतिष सूर्य सिधान्त पर ही टिका है कि सूर्य हर महीने लगभग 14-15-16 या 17 तारीख से अगले महीने की 14-15-16 या 17 तारीख तक एक राशि में रह कर फिर अगली/दूसरी राशि में चलता जाता है | 15 अप्रैल से 14 अप्रैल तक सभी 12 राशियों को भोग कर फिर 14/15 अप्रैल को अपनी पसंदीदा राशि मेष में आ जाता है | 15/16 मई से सूर्य अगली राशि वृष में व् इस तरह हर राशि में चलता जाता है | बाकि ग्रह सूर्य के पीछे पीछे चलते हुए आगे भी निकल जाते हैं अपनी गति-स्पीड के कारण |
प्रत्येक ग्रह की एक राशि भोगने की अवधि नीचे दी जा रही है :
Sun -सूर्य एक राशि में –1 महीना
Moon-चन्द्र एक राशि में – सवा दो दिन (54 घंटे)
Mars-मंगल एक राशि में – 45 दिन
Mercury-बुध एक राशि में – 20 दिन
Jupiter-गुरु एक राशि में – 1 वर्ष (लगभग)
Venus- शुक्र एक राशि में – 25 दिन
Saturn-शनि एक राशि में – ढाई वर्ष
Dragon’s Head-राहू एक राशि में – डेढ़ वर्ष
Dragon’s Tail- केतु एक राशि में – डेढ़ वर्ष
अन्य ग्रह बहुत बहुत दूर होने के कारण, उनका पृथ्वी पर न्यून या नगण्य प्रभाव होने के कारण उनका यहाँ वर्णन नहीं किया जा रहा है |
ग्रह अस्त कब होते हैं ?
When planets get combusted ?
ग्रह जब सूर्य की ओर चलते रहते हैं व् सूर्य के समीप होने लगते हैं तो सूर्य के प्रकाश में उन ग्रहों की अपनी चोंधक लुप्त प्राय हो जाती है व् ग्रह उस प्रकाश में अंधे प्राय हो जाते हैं | तब ये अस्त माने जाते हैं |
- Ø सूर्य अस्त नहीं होता, तुला राशि में (लगभग 15 अक्तूबर से 14 नवम्बर तक) नीच होकर जातक को हानि पहुंचाता है |
- Ø चन्द्र अमावस के दिन अस्त हो जाता है | कृष्ण पक्ष की एकादशी से शुक्ल पक्ष की पंचमी तक चन्द्रमा कमजोर माना जाता है |
- Ø मंगल, बुध, गुरु, शुक्र व् शनि सूर्य की ओर जाते हुए हर वर्ष उस अवधि में अस्त हो जाते हैं जब वे सूर्य की रेंज में आ जाते हैं |
- Ø राहू ने अमृतपान किया है व् गले तक अमृत जाने पर भगवान विष्णु द्वारा गला कटे जाने से यह ग्रह नजर नहीं आता ( राहू सदैव अस्त रहता है ) परन्तु इसके शुभाशुभ प्रभाव प्रत्यक्ष देखे व् अनुभव किये जाते हैं | यह ग्रह राक्षसों से सम्बन्धित है अत सूर्य का इस पर न के बराबर प्रभाव है जबकि यह सूर्य (पिता) को निबटा देता है | राहू सभी राशियों की यात्रा करता है | यह ग्रह सदैव ही वक्र गति अर्थात उलटी चाल/उलटी गति से चलता रहता है |
- Ø केतु ग्रह राहू के गले से नीचे का सारा शरीर है | अंग भंग होना, चोट लगना, ऊंचाई से गिरना आदि केतु ही करता है | यह ग्रह भी नजर नहीं आता, सदैव अस्त रहता है | केतु सभी राशियों की यात्रा करता है | यह ग्रह सदैव ही वक्र गति अर्थात उलटी चाल/उलटी गति से चलता रहता है |
ग्रह वक्री क्यों होते हैं ?
WHY planets go retrogorade ?
ग्रह सूर्य की ओर जाते हुए सूर्य के करीब होते होते अस्त हो जाते हैं | तब भी ग्रह न दिखते हुए, अस्त होते हुए भी सूर्य की ओर बढ़ते रहते हैं | परन्तु, जब ये सूर्य के अत्यधिक पास होते हैं तो सूर्य की गर्मी न सहने की स्थिति में ये वापिस चलना शुरू कर देते हैं | ओवल के एक ओर सूर्य आगे बढ़ रहा होता हैं दूसरी ओर अस्त ग्रह सूर्य से वापिस व् दूर भागने लगता है, ऐसे में वह ग्रह उल्टा चलता दीखता है | वक्र ग्रह अधिक बलशाली तो होते हैं परन्तु जरूरी नहीं कि वक्र ग्रह लाभकारी हों | राहू व् केतु भी कुछ राशियों में लाभकारी हैं अन्यथा हानि कारक, मारक या बिमारी आदि दे देते हैं |
ग्रहों की वक्रता व् इस की समय अवधि सम्बन्धी नियम नीचे दिया जा रहा है :
ग्रह |
वक्रता का नियम/ Retrogression period each year |
वक्री होने से पहले/बाद में स्थिर होने में लगता समय /Cooling time |
मंगल/ Mars |
लगभग 2 वर्ष में 80 दिन वक्री |
3 – 4 दिन |
बुध/Mercury |
1 वर्ष में 3 बार – हर बार 24 दिन के लिए वक्री |
1 दिन |
गुरु बृहस्पति /Jupiter |
1 वर्ष में 120 दिन वक्री |
5 दिन |
शुक्र/ Venus |
19 महीनों में 1 बार 42 दिन के लिए वक्री |
2 दिन |
शनि /Saturn |
1 वर्ष में 140 दिन वक्री |
5 दिन |
अब ज्यों ही कोई ग्रह वक्री होता है, उसके नकारात्मक प्रभाव पृथ्वी के जीव जन्तुओं वनस्पति व् हर व्यक्ति पर पड़ते हैं | इससे व्यक्ति व् जीवों के विचार, बुद्धि, चिन्तन निर्णय व् शुभ-अशुभ कार्य आदि प्रभावित होते हैं |
अन्तत, अस्त ग्रह हानि न के बराबर करते हैं परन्तु हर वर्ष/माह कोई न कोई ग्रह वक्री होता रहता है व् उसके हानिकारक प्रभाव जन मानुष पर पड़ते हैं | नारायण, नारायण |
ज्योतिष का ज्ञान रखने वाले विद्वान उपरोक्त लेख में कमियां लिखें तो मैं अपने ज्ञान वृद्धि के लिए उनका धन्यवादी होऊंगा | आलोचना करते हुए अपना तर्क अवश्य दें | केवल आलोचना के लिए आलोचना की आवश्यकता नहीं है | अकारण या नास्तिक होने पर अज्ञानी की तरह टिप्पणी करने से क्या लाभ ?
इस लेख पर कृपया अपने सुझाव/टिप्पणी/आलोचना ईमेल
ग्रहों की गति, अस्तता व् वक्रता
Combustion and Retrogression of Planets
इसके लिए आप देखें : www.panditjksharma.com OR Astrologer J K Sharma इस लेख पर कृपया अपने सुझाव/टिप्पणी/आलोचना ईमेल