वक्री शनि धनु से चले वापिस वृश्चिक राशि 6 अप्रैल
आपकी नाम राशि अनुसार आप पर वक्र शनि का प्रभाव
शनि साढ़ेसाती क्या होती है ? : शनि एक राशि पर ढाई वर्ष रहते हैं | चन्द्र राशि से पहली राशि पर आने पर शनि साढ़ेसाती शुरू हो जाती है, जन्म/चन्द्र राशि चन्द्रमा पर शनि आने पर शनि साढ़ेसाती चरम सीमा पर होती है व् चन्द्र राशि से अगली राशि पर शनि जाने पर साढ़ेसाती उतरती होती है | इस तरह साढ़े सात-आठ वर्ष लग जाते हैं क्योंकि हर वर्ष शनि वक्री भी चलता है | अलग अलग राशि पर साढ़ेसाती के इन तीनों चरणों के अलग अलग प्रभाव होते हैं | (इसी वेबसाइट पर देखें लेख : शनि साढ़ेसाती क्या होती है) |
शनि देव 26 जनवरी 2017 से गुरु बृहस्पति की राशि धनु में आ पहुंचे हैं | जिन लोगों का जन्म कुंडली में गुरु बृहस्पति ठीक है, वक्री नहीं है उन्हें लाभ ही होगा | यदि कुंडली में बृहस्पति जन्म से ही वक्री है तो उन जातकों को बृहस्पति व् शनि सम्बन्धी अशुभ प्रभाव अधिक होंगे |
शनि धनु राशि में 6 अप्रैल 2017 से वक्री होने पर (व् 20 जून 2017 से वृश्चिक में वापिस आने पर) अपने नकारात्मक प्रभाव देंगे | इसके अतिरिक्त गुरु बृहस्पति भी 6 फरवरी से 10 जून तक वक्री हैं | बुध 9 अप्रैल से 3 मई तक मेष राशि में वक्री चलेंगे | शुक्र 15 अप्रैल तक मीन में वक्री चल ही रहे हैं | इनके सम्भावित प्रभाव इस प्रकार हैं :-
मेष लगन/राशि ( नाम अक्षर: चू,चे,चो,ला,ली,लू,ले,लो,अ ): भाग्योदय में रुकावट सम्भव 15 मई के बाद | वाहन ध्यान से चलायें 9 अप्रैल से 3 मई विशेषकर |
वृष राशि ( नाम अक्षर: ई,उ,ए,ओ,वा,वी,वू,वे,वो ) : पेट सम्बन्धी उपचार पर ध्यान दें | विदेश की सैर पर खर्च करें | आपकी राशि पर शनि का ढया भी है |वाहन ध्यान से चलायें विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |
मिथुन लगन/राशि ( नाम अक्षर: क,की,कु,घ,ड,छ,के,को,ह ) : जॉब व् व्यापार में अप्रैल से अगस्त तक थोड़ी रुकावट सम्भव | पेट खराबी से बचें 9 अप्रैल से 3 मई विशेषकर | अगस्त तक वाहन चालन व् खर्चों पर नियन्त्रण रखें व् स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें |
कर्क लगन/राशि ( नाम अक्षर: हि,हु,हे,हो,डा,डी,डू,डे,डो ): शत्रु अधिक, धोखे व् धन हानि से बचे 2020 तक | अगस्त तक शनि वक्री होने पर कोर्ट, बैंक, इनकम टैक्स आदि से परेशानी सम्भव | वाहन व् का ख्याल करें |जॉब बहुत ध्यान से करें विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |
सिंह लगन/राशि ( नाम अक्षर: मा,मी,मू,में,मो,टा,टी,टू,टे ) : अगस्त तक पेट खराबी, सन्तान को कष्ट व् आय में रुकावट | भाग्य में रुकावट व् तनाव विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |
कन्या लगन/राशि ( नाम अक्षर: टो,पा,पी,पू,ष,ण,ठ,पे,पो ) : वाहन खराबी-दुर्घटना व् घर में कलह | शनि के ढैया के कारण कष्ट रहेंगे | पेट खराबी से बचें विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |
तुला लगन/राशि ( नाम अक्षर: रा,री,रु,रे,रो,ता,ती,तू,ते ) : वाहन ध्यान से चलायें व् घबराहट पर सयम व् काबू रखें | व्यापार कारोबार में रुकावट व् हानि विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |अनावश्यक खर्चे व् ढीला स्वास्थ्य |
वृश्चिक लगन/राशि ( नाम अक्षर: तो,ना,नी,नू,नेनो,या,यी,यू ): आपकी राशि पर शनि साढ़ेसाती का तीसरा चरण लाभकारी परन्तु 20 जून से अगस्त तक वक्री शनि रुकावटें खड़ी करेगा, वाणी खराब, परिवार सन्तान को कष्ट व् धन हानि करेगा | वाहन ध्यान से चलायें व् शत्रुओं से बचें विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच | स्वास्थ्य की रक्षा करें |
धनु लगन/राशि ( नाम अक्षर: ये,यो,भा,भी,भू,धा,फ,ढ,भे ) : शनि साढ़ेसाती का दूसरा चरण लाभकारी है परन्तु अप्रैल से जून/अगस्त तक वक्री शनि शारीरिक कष्ट, रुकावटें, निज जन विरोध, दुर्घटना-बीमारी पर अनावश्यक धन व्यय कराएगा | पेट खराबी व् सन्तान चिंता सम्भव विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच | महामृत्युंजय जप करें | सितम्बर/अक्टूबर से लाभ |
मकर लगन/राशि ( नाम अक्षर: भो,ज,जा,जी,जे,जो,खा,खी,खु,खे,खो,गा,गी ) : शनि साढ़ेसाती का प्रथम चरण कष्टकारी है | बैंक, इनकम टैक्स आदि से समस्या | शनि वक्री होने पर बीमारी, रक्त विकार, 20 जून से पेट सम्बन्धी समस्या व् सन्तान कष्ट आदि अगस्त तक अधिक होंगे | स्वयम महामृत्युंजय जप करें | वाहन ध्यान से चलायें विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |
कुम्भ लगन/राशि ( नाम अक्षर: गु,गे,गो,सा,सी,सु,से,सो,दा ) : सन्तान चिंता, पेट लीवर किडनी आदि की खराबी सम्भव | अनावश्यक घबराहट सम्भव विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच | 20 जून से कार्यालय व् व्यापार में हानि व् समस्याएँ |
मीन लगन/राशि ( नाम अक्षर: दी,दू,थ,झ,दे,दो,चा,चि ) : अगस्त तक ऑफिस या व्यापार में समस्याएँ व् भाग्य में रुकावट | वाहन ध्यान से चलायें | सितम्बर से समय अच्छा होगा | परिवार में अनबन व् धन हानि विशेषकर 9 अप्रैल से 3 मई के बीच |
ज्योतिष का ज्ञान रखने वाले विद्वान उपरोक्त लेख में कमियां लिखें तो में अपने ज्ञान वृद्धि के लिए उनका धन्यवादी होऊंगा | आलोचना करते हुए अपना तर्क अवश्य दें | केवल आलोचना के लिए आलोचना की आवश्यकता नहीं है | अकारण या नास्तिक होने पर अज्ञानी की तरह टिप्पणी करने से क्या लाभ ?
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नारायण, नारायण |
वक्री शनि धनु से चले वापिस वृश्चिक राशि
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