अकाट्य वैदिक  ज्योतिष

  (अपना भविष्य स्वयम जानें)

-डॉ जे के शर्मा (98760 42656)

पहले अंडा आया कि  मुर्गी ? गेंहू का पहला दाना कहाँ से मिला ?

इन प्रश्नों का कोई स्पष्ट व् तर्कपूर्ण जवाब उपलब्ध नहीं है |

इन प्रश्नों का कोई सीधा व् तर्कपूर्ण उत्तर किसी वैज्ञानिक या आस्तिक या नास्तिक से प्राप्त नहीं होता | अन्तत, यह मानना पड़ता है कि एक अदृश्य शक्ति विश्व भर को संचालित कर रही है | इसके अतरिक्त संसार भर में विभिन्न अंधविश्वास आज इक्कीसवीं शताब्दी में भी चल रहे हैं तब जब संसार के अधिकतर लोग शिक्षित हैं व् शिक्षित होते जा रहे हैं | शिक्षा व् ज्ञान का प्रचार व् प्रसार भी निरंतर हो रहा है | विश्वास कीजिये कि केवल भारतीय ही अन्धविश्वासी नहीं बल्कि पूरे विश्व  में लोग अन्धविश्वास से  भरे पड़े हैं | आप  विज्ञान की कसोटी पर ज्योतिष को परखिये और अन्धविश्वासी न बनें | 

कुछ लोग अच्छे व् बुरे शकुन भी मानते हैं जबकि इनमे से कुछ  शकुनों का कोई वैज्ञानिक तथ्य सम्भव नहीं है | कुछ शकुन या वहम  रुढ़िवादी लोगों की धारणा है या बुजुर्गों द्वारा सुने गई कहानियों पर आधारित है | बहुत सी बातें काल्पनिक एवं  परियों की कहानी पर आधारित हैं |

और, इसी तरह कभी कभी ज्योतिष शास्त्र को अन्धविश्वास माना जाता है जबकि भारत व् विदेश के विभिन्न विश्विद्यालयों में ज्योतिष पढाया जाता है | मध्य प्रदेश भारत में ज्योतिष आधार पर रोगियों का इलाज किया जाता है क्योंकि आयुर्वेद में ग्रहों का पूर्ण विवरण, इनसे सम्बन्धित रोग व् उनके आयुर्वेदिक इलाज का वर्णन है | विज्ञान की तरह ज्योतिष भी कारण व् प्रभाव (फल) के सिद्धांत पर ही चलता है तथा इसके प्रभाव होना भी सुनिश्चित है | 

कीरो द्वारा 100 वर्ष पहले की गयी भविष्य वाणी सच होती जा रही है | बहुत से  शोध के बाद आधुनिक वैज्ञानिक ज्योतिष शास्त्र को पैरा-साइंस मान लिया है | संसार के सभी देशों में ग्रहों को मान्यता प्राप्त है केवल भाषा अलग होने के कारण ग्रहों के नाम उस देश की भाषा के अनुसार अलग हैं अन्यथा वही ग्रह व् वही उनके प्रभाव और वही दिनों के नाम व् उनसे सम्बन्धित ग्रह  |

सभी देश,  ग्रह तथा उनसे सम्बन्धित ग्रह-स्वामी के सिद्धांत से सहमत हैं | सभी देश मानते हैं कि एक अदृश्य शक्ति ब्रह्माण्ड को चला रही है जिसे हर देश अपनी अपनी भाषा में अलग नाम से पुकारता है | सारी दुनियां ज्योतिष शास्त्र पर विशवास कर रही है | भारत  में व् विदेश में भी, पुराने राजा आदि अपने दरबार में “राज ज्योतिषी” रखते रहे हैं |

विज्ञान की तरह ज्योतिष शास्त्र में अध्यात्म, दर्शन, तर्क,  गणित, अभिव्यक्ति एवं विशेष रूप से ईश्वर कृपा है |  विश्व के सभी देशों में 12 राशियाँ व् कम से कम 9 ग्रह स्वीकृत हैं :-

क्रमांक

अंग्रेजी नाम

हिंदी नाम

राशि स्वामी ग्रह

1

Aeries

मेष

मंगल

2

Taurus

वृष

शुक्र

3

Gemini

मिथुन

बुध

4

Cancer

कर्क

चन्द्र

5

Leo

सिंह

सूर्य

6

Virgo

कन्या 

बुध

7   

Libra

तुला

शुक्र

8   

Scorpio

वृश्चिक

मंगल

9   

Sagittarius

धनु

बृहस्पति

10   

Capricorn

मकर

शनि

11   

Aquarius

कुम्भ

शनि

12   

Pieces

मीन

बृहस्पति

13   

Dragon’s Head

 

राहू

14   

Dragon’s Tail

 

केतु

 

ज्योतिष शास्त्र एक विज्ञान है – यह एक अकाट्य सत्य है | इसकी कई शाखाएं हैं – जैसे – नुमोरोलोजी (संख्याओं पर आधारित), हाथ की रेखाएं, पैर की रेखाएं, चेहरा व् चेहरे की बनावट, शरीर के विभिन्न अंगों (बाल, कान, नाक, आँख,  माथा आदि),  के हावभाव तथा  हस्ताक्षर पढना आदि हैं | ज्योतिष कोई अंदाजा या तुकबंदी नहीं है |

       ग्रहों के वर्ष – समय अवधि विशेष में शत-प्रतिशत प्रभाव को कोई गलत साबित नहीं कर सका है न ही गलत साबित कर पायेगा | संसार का हर व्यक्ति (स्त्री-पुरुष) अपना भूतकाल व् वर्तमान भी निम्न मापदंड पर जांच परख सकता है व् ज्योतिष का ज्ञान होने पर भविष्य भी ज्ञात कर सकता है |

क्रम

   ग्रह

ग्रह का फलदायक

वर्ष विशेष/जीवन में ग्रह की विमशोत्तरी दशा

          ग्रह के प्रभाव

1

गुरु बृहस्पति

आयु के 18 से 20 वर्ष, विमशोत्तरी दशा 16 वर्ष 

धार्मिक व् संयमित व्यक्ति, ज्ञान का भंडार, अच्छा वक्ता, उच्च व् अच्छी शिक्षा, विवाह, पुत्र, वाहन, अच्छे पति/पत्नी देने वाला, धन व् सम्पत्ति देने वाला ग्रह |(यदि बृहस्पति जन्म से नीच या वक्री तो हो प्रभाव इससे उल्ट-विपरीत होंगे )

2

सूर्य

आयु का 22 वां  वर्ष, विमशोत्तरी दशा 6 वर्ष 

चेहरे पर नूर, शिक्षा सर्वश्रेष्ठ. गोल्ड मैडल सम्भव, राज्य सरकार/यूनिवर्सिटी की जॉब,पुत्र व् पौत्र देने वाला ग्रह (सूर्य तुला राशि में नीच होकर 16 अक्तूबर से 16 नवम्बर के बीच जन्म होने पर या कुंडली में 12वें घर होने पर उपरोक्त के विपरीत परिणाम देगा)

3

चन्द्र

आयु का 24 वां  वर्ष, विमशोत्तरी दशा 10 वर्ष 

भावुक, कल्पनाशील, शांत होना| अच्छी शिक्षा | दूध, पानी व् तरल पेय से सम्बन्धित कार्य, नेवी, सिंचाई, कृषि में जॉब |(अमावस्या, चन्द्र वृश्चिक में नीच होने या आठवें घर में होने पर अपूर्ण लाभ )

4

शुक्र

आयु का 25 वां  वर्ष, विमशोत्तरी दशा 20 वर्ष 

प्रसिद्धी, पत्रकार,संगीत, विडियो व् फ़िल्में, कॉमर्स, फैशन, शराब, दाम्पत्य सुख,सन्तान आदि (शुक्र कन्या राशि में नीच होने या वक्री होने पर इसके विपरीत परिणाम )

5

मंगल

आयु का 28 वां  वर्ष, विमशोत्तरी दशा 7  वर्ष 

सेना, पुलिस, डॉक्टर, केमिस्ट, फार्मासिस्ट, प्रॉपर्टी डीलर, होटल व्यवसाय व् दाम्पत्य तथा पुत्र लाभ आदि (मंगल जन्म से वक्री या कर्क में नीच होने पर विपरीत परिणाम)

6

शनि

आयु का 30वां व् विशेषकर 36 वां  वर्ष, विमशोत्तरी दशा 19   वर्ष 

अत्याधिक मेहनत, शुभ व् विशेष लाभ 36 वें वर्ष में, गजेटिड अधिकारी, पुरातत्व वेता, केंद्रीय सरकार जॉब आदि (शनि जन्म से नीच राशि मेष में या जन्म से वक्री हो तो परिणाम विपरीत होंगे )

7

बुध

आयु का 32 वां वर्ष, कन्या व् मिथुन राशि को 50 व् 55 वें वर्ष भी लाभकारी,  विमशोत्तरी दशा 17    वर्ष 

उच्च शिक्षा, गणितज्ञ, दांतों का डॉक्टर, व्यापार व् व्यापारी, 32 वें वर्ष में विवाह सन्तान अवश्य यदि पहले नहीं हुआ | (बुध जन्म से मीन राशि में नीच होने या वक्री होने पर विपरीत परिणाम, धन हानि व् सबसे धोखा भी )

8

राहू

आयु का 42वां वर्ष, विमशोत्तरी दशा 18    वर्ष 

कंप्यूटरस, हिस्ट्री, पोलिटिकल साइंस में दक्ष, राजनेता, लम्बा व् ऊँचा, बहुत तेज कामकरने वाला, गुस्सेल व्यक्ति |(राहू धनु राशि में नीच होने पर विपरीत परिणाम व् आत्म हत्या का इच्छुक )|

9

केतु

आयु का 48 वां वर्ष, विमशोत्तरी दशा 7     वर्ष 

परिश्रमी, अपंग, पोलियो ग्रस्त, अनजाने बुखारों से पीड़ित, उपरी शक्तियों का ज्ञाता, दूर दृष्टि रखने वाला | इनाम व् अचानक लाभ व् खजाने प्राप्त करने वाला | (केतु मिथुन में नीच होने पर कष्टकारी व् बीमारियाँ देने वाला, दुर्घटना व् हाथ पैरों पर चोट मारने वाला व् अन्य विपरीत परिणाम )

 

भौतिक शास्त्र (फिजिक्स) में इन सभी ग्रहों की पूरी जानकारी है | सूर्य सभी ग्रहों का पिता है | सभी ग्रह सूर्य की ओर जाते हुए उसकी और बढ़ते हैं | एक निश्चित गति से ग्रह सूर्य की ओर चलते रहते/वापिस-वक्र होते रहते व् फिर आगे चलते रहते हैं |  सूर्य के समीप पहुँचने पर ग्रह अस्त ( कम्बस्ट ) हो जाता है जिसे भारत में तारा डूबना भी कहते हैं | अस्त ग्रह कम लाभ देते हैं | तब भी, अस्त तारा जो हम दूरबीन से नहीं देख पाते, अपनी गति से सूर्य की ओर बढ़ता रहता है | सूर्य के अधिक समीप जाने पर अत्यधिक गर्म होते होते, तारा (ग्रह) वापिस आता प्रतीत होता है जिसे हम ग्रह वक्री हो जाना (रेट्रोग्रेसन)  कहते हैं | ऐसे वक्री ग्रह, किसी व्यक्ति के जन्म के समय,  वक्र होने के कारण उस व्यक्ति पर तथा सामान्यत पृथ्वी पर,  अपना नकारात्मक व् हानिकारक प्रभाव डालते हैं | 

हर वर्ष ग्रह वक्री होते रहते हैं (उलटे चलते हैं) जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है :

  • Ø बृहस्पति हर वर्ष 120 दिन के लिए वक्री होता है |
  • Ø सूर्य स्वयम कार्तिक माह में (लगभग 16 अक्तूबर से 16 नवम्बर तक) नीच राशि तुला में आकर जातक को हानि करता है |
  • Ø चन्द्रमा अमावस के दिन अत्यधिक कमजोर स्थिति में होता है | वृश्चिक में नीच व् आठवें घर में होने से लाभकारी नहीं होता |
  • Ø शुक्र 19 महीनों में 42 दिन के लिए वक्री होता है |
  • Ø मंगल 2 वर्ष में 80 दिन में वक्री होता है |
  • Ø शनि हर वर्ष 140 दिन के लिए वक्री होता है|
  • Ø बुध एक वर्ष में 3 बार - हर  बार अधिक से अधिक 24 दिन के लिए - वक्री होता है |
  • Ø राहू व् केतु सदैव वक्री-उलटे ही चलते रहते हैं | 

सभी ग्रह किसी भी व्यक्ति व् जीव पर उसके जन्म से लेकर उसके पूरे जीवन भर असर डालते हैं | शुभ ग्रह कुंडली के 6, 8 व् 12 वें घर में होने पर अपना पूरा लाभ नहीं दे पाते जबकि अशुभ ग्रह 6, 8 व् 12 वें घर में शुभ फल दे देते हैं |

ग्रहों के फल देने वाले विशेष वर्ष की समय अवधि - जो उपर टेबल में दी गयी है- में सम्बन्धित ग्रह अपना शत प्रतिशत अच्छा या बुरा प्रभाव देते हैं | इन वर्षों में ग्रहों के प्रभाव को न तो कोई गलत साबित कर पाया है न ही गलत साबित कर सकता है |

विज्ञानं की तरह इन ग्रहों के वर्ष विशेष में प्रभाव का अकाट्य प्रमाण नीचे दिया जा रहा है | आप स्वयम अपने पर, परिवार के अन्य सदस्यों व् रिश्तेदारों पर निम्न उदाहरण के आधार पर जांच कर सकते हैं कि उक्त वर्ष विशेष में लाभ या हानि हुई व् ऐसा  क्यों हुआ ??

आइये, इस विद्या व् ज्ञान को परखें :

उदाहरण:

मान लें की किसी व्यक्ति का जन्म 23.1.1986 का है | उसके जीवन पर इन ग्रहों का  प्रभाव उपरोक्त विवरण के अनुसार इस प्रकार रहा है व् भविष्य में भी पड़ेगा | आप अपने या अपने मित्र रिश्तेदार के जन्म के वर्ष में निम्न प्रकार सम्बन्धित ग्रह का वर्ष जोड़ें | उस वर्ष के जन्म दिन से अगले वर्ष के जन्म दिन तक उस ग्रह का शुभ या अशुभ लाभ हानि फल आदि स्पष्ट रूप में मिला है व् भविष्य में वर्षों में बचे हुए ग्रहों की अवधि में उन ग्रहों के प्रभाव अभी आने हैं |

आप अपने या अपने घर के सदस्यों, मित्रों व् रिश्तेदारों के जीवन के उपरोक्त दिए गये वर्षों में  ग्रहों के हानि-लाभ आदि स्वयम ही जांच कर सकते हैं | यदि लाभ नहीं हुआ तो निश्चित हैं कि आपका सम्बन्धित ग्रह जन्म से  ही अस्त/नीच राशि में /वक्री/शत्रु क्षेत्री या कुंडली के 6 वें घर (शत्रु-बीमारी  के घर), 8 वें घर (मारक घर में) या 12 वें घर (व्यय/मोक्ष आदि के घर में) है व् इसी कारण लाभ के स्थान पर हानि आदि हुई है/या होगी  | इस प्रकार, प्रत्येक जीव के जीवन पर ग्रहों का स्पष्ट प्रभाव होता ही है | 

 उपरोक्त वर्ष विशेष के ग्रह तथा चल रही विंशोत्तरी दशा के ग्रह के प्रभाव आप देखें, अनुभव करें तो इन्हें  सच पाएंगे |

यदि आयु 48-50 वर्ष हो चुकी तो अब वर्तमान में चल रही विमशोत्तरी दशा के प्रभाव अनुसार फल मिलता जायेगा |

निम्न उदाहरण को प्रयोग करके देखें :

     गुरु बृहस्पति      23.1.1986 (जन्म तारीख)(आयु का 18-19-20वां वर्ष)

+    00.0.0018 (23.1.2004 से 23.1.2005 गुरु के प्रभाव 

+    00.0.0019 (23.1.2005 से 23.1.2006 गुरु के प्रभाव 

+    00.0.0020 (23.1.2006 से 23.1.2007(20वें                                     विशेष वर्ष में गुरु के अधिक सकारात्मक प्रभाव)

सूर्य              23.1.1986 (जन्म तारीख)  (आयु का 22 वां वर्ष)

+    00.0.0022(23.1.2008 से 23.1.2009)सूर्य के प्रभाव

चन्द्र             23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 24 वां वर्ष)

+    00.0.0024(23.1.2010 से 23.1.2011)चन्द्र के प्रभाव

शुक्र             23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 25 वां वर्ष)

+    00.0.0025(23.1.2011 से 23.1.2012) शुक्र के प्रभाव

मंगल            23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 28 वां वर्ष)

+    00.0.0028(23.1.2014 से 23.1.2015)मंगल के प्रभाव

शनि             23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 30 वां वर्ष)

+    00.0.0030(23.1.2016 से 23.1.2017)शनि के प्रभाव

बुध              23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 32 वां वर्ष)

+    00.0.0032(23.1.2018 से 23.1.2019)बुध  के प्रभाव

शनि             23.1.1986 (जन्म तारीख)(आयु का 36वां विशेष वर्ष)

+    00.0.0036(23.1.2022 से 23.1.2023)शनि के प्रभाव

राहू              23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 42 वां वर्ष)

+    00.0.0042(23.1.2028 से 23.1.2029)राहू के प्रभाव

केतु             23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 48 वां वर्ष)

+    00.0.0048(23.1.2034 से 23.1.2035)केतु के प्रभाव

बुध         (50 वां वर्ष : जन्म से मिथुन व् कन्या राशि या इन्हीं राशियों के नाम वाले व्यक्तियों के लिए इस वर्ष बुध के विशेष लाभ यदि मार्गी है, उदय होने पर बहुत अच्छा व् अस्त होने पर लाभ में थोड़ी कमी)   

23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 50 वां वर्ष)

+    00.0.0050(23.1.2036 से 23.1.2037)बुध के प्रभाव

बुध         (55 वां वर्ष : जन्म से मिथुन व् कन्या राशि या इन्हीं राशियों के नाम वाले व्यक्तियों के लिए इस वर्ष बुध के विशेष लाभ यदि मार्गी है, उदय होने पर बहुत अच्छा व् अस्त होने पर लाभ में थोड़ी कमी)  

23.1.1986 (जन्म तारीख) (आयु का 55 वां वर्ष)

+    00.0.0055(23.1.2041 से 23.1.2042)बुध के प्रभाव

(हर वह वर्ष जिसकी संख्या का जोड़ 5 होगा, उस वर्ष मिथुन व् कन्या राशि के व्यक्तियों को विशेष लाभ होंगे यदि जन्म से बुध मार्गी व् उदय/अस्त है | उदाहरण : 2021, 2030 आदि )

अंक गणित अनुसार निम्न विचार किया जाता है | किसी  वर्ष की संख्या का जोड़ 1 होने पर  सूर्य, जोड़ 2 होने पर चन्द्र, जोड़ 3 होने पर गुरु बृहस्पति,  जोड़ 4 होने पर हर्षल/सूर्य, जोड़ 5 होने पर बुध, जोड़ 6 होने पर शुक्र, जोड़ 7 होने पर वरुण-जल/नेपच्युन , जोड़ 8 होने पर शनि व्  जोड़ 9 होने पर मंगल  ग्रहों का विशेष प्रभाव लाभ (जन्म समय ग्रह अस्त/वक्री/नीच/शत्रु क्षेत्री/आठवें या बाहरवें घर में होने पर हानि) आदि प्राप्त होंगे |

जब आपेक्षित लाभ न मिला हो/अब न मिल रहा हो या भविष्य में अंदेशा हो कि ग्रह विशेष का वर्ष विशेष में या चल रही/चलने वाली विमशोत्तरी दशा में लाभ नहीं मिलेगा, तो आप विद्वान् ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें |

  • Ø कंप्यूटर  पर फ्री जन्म पत्री खोल के अपना नाम, जन्म तारीख, जन्म समय व् जन्म का जिला भरें | आपकी कुंडली सामने आ जाएगी |
  • Ø ग्रहों का उदय, अस्त, मार्गी व् वक्रता देख लें |
  • Ø आवश्यक :  चेक करें कि उपरोक्त किसी ग्रह का वर्ष विशेष चल रहा है या नहीं ?
  • Ø आवश्यक :चल रही विमशोत्तरी दशा का पेज खोले व् उसमे किस ग्रह की दशा चल रही है व् उसमे अन्य किस ग्रह का अंतर/प्रत्यंतर चल रहा है, भी देखें |
  • Ø अब आप उपरोक्त सूचनाओं के आधार पर अंदाज़ा लगाइए कि  आपको क्या लाभ या हानि हो रही है या होने वाली है ? आपको किस ग्रह के उपाय करने चाहियें ?
  • Ø यदि शनि साढ़ेसाती चल रही हो तो बात अलग है | ऐसे में वर्ष विशेष के ग्रह, विमशोत्तरी दशा के ग्रह, शनि व् चन्द्र आदि  सब ग्रहों  के उचित व् सम्भव उपाय आदि करने आवश्यक हो जाते हैं |
  • Ø शनि साढ़ेसाती के विवरण के लिए आप देखें  www.panditjksharma.com

कुंडली में राहू नीच (राहू धनु में, राहू-9) होने पर आप देखें  आत्म हत्या से कैसे बचें लेख  www.panditjksharma.com  पर |

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आप सबको शुभकामनाएं | धन्यवाद |