राहू उच्च राशि मिथुन में

केतु उच्च  राशि धनु में

(7 मार्च 2019 से 21 सितम्बर 2020 तक) के प्रभाव

-डॉ  जे के शर्मा

नोट :(क) आप अपनी जन्म राशि  या (ख) प्रसिद्ध नाम राशि या  (ग) आपको अपनी जन्म की तारीख, वर्ष, समय आदि पता ही न हो तो भी प्रसिद्ध नाम की राशि से आप राहू केतु का प्रभाव देख सकते हैं |

(राहू व् केतु 7 मार्च 2019 सुबह 18 वर्ष बाद अपनी अपनी उच्च राशि क्रमश मिथुन व् धनु में प्रवेश कर रहे हैं | उच्च होने पर ग्रह हानि नहीं देते | तब भी, यदि राहू ग्रह आठवें या बाहरवें घर या अन्य इम्पोर्टेन्ट घर (पांचवां /नोवाँ आदि) पर आयें तो लाभ कम हानि अधिक करता है | ऐसे में, आप जान सकते हैं कि आप के लिए राहू व् केतु हानिकारक होंगे या लाभदायक |)  मिथुन व् धनु राशि वाले लोगों को शुभ लाभ अधिक मिलने की आशा है |

 

राशि अनुसार फल  (संक्षिप्त में लिखा जा रहा है)

 

मेष राशि/लग्न  : (आपके नाम का शुरू का अक्षर : चू,चे,चो,ला,ली,लू,ले,लो,अ):  

आप की  कुंडली के तीसरे घर में राहू उच्च होकर आपके पराक्रम को बढ़ाएगा | आपका आत्मबल व् आत्म विश्वास श्रेष्ट होगा | निडर होकर आप अपने कार्य कर पाएंगे | केतु गुरु के घर  नोवें भाव में लाभ देगा व् नाम प्रतिष्ठा बढ़ाएगा | (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर अनावश्यक घबराहट से बचें अन्यथा हार्ट समस्या शुरू हो जाएगी | (इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु के दान करें  )

 

वृष राशि/लग्न  : (आपके नाम का शुरू का अक्षर :ई,उ,ए,ओ,वा,वी,वू,वे,वो)

आप की  कुंडली के दूसरे घर में उच्च राहू आपको विदेश की सैर कराएगा या जॉब देगा अन्यथा घर से दूर आप जायेंगे | केतु  आठवें भाव में पेट खराब करेगा व् बवासीर कर सकता है | (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर अनावश्यक खर्चे व् यात्रायें होंगी जो लाभकारी नहीं होंगे | मारक स्थिति बन सकती हैं |चोट दुर्घटना से बचें |  (इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

मिथुन राशि/लग्न  : (आपके नाम का शुरू का अक्षर : क,की,कु,घ,ड,छ,के,को,ह)

आप की  कुंडली के लग्न पर  उच्च राहू आपको तेज बुद्धि, लालची बनाएगा | अनावश्यक चिंता, योजनायें आप बनायेंगे | धन लाभ, हर प्रकार से, बढ़ेगा | यात्रायें व् भाग दोड़ अधिक होगी | कार्यों में देरी सम्भव |  केतु सातवें भाव में पति /पत्नी का स्वास्थ्य कमजोर रखेगा | कार्य व्यापार में कमी आएगी | (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर कार्य व्यापार जॉब में समस्या खड़ी कर सकता है | पति/पत्नी /पुत्र का स्वास्थ्य ढीला सम्भव | वाहन ध्यान से चलायें  चोट दुर्घटना से बचें |   इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

कर्क राशि/लग्न  (आपके नाम का शुरू का अक्षर : हि,हु,हे,हो,डा,डी,डू,डे,डो)

आप की  कुंडली के बाहरवें घर खर्चे मोक्ष के घर   उच्च राहू आपको अधिक लाभ नहीं देगा, अनावश्यक खर्चे व् यात्रायें करवाएगा | सामने छ्टे घर में गुरु शनि केतु आपको बीमार करेंगे व् कष्ट देंगे, अत्यधिक खर्चा सम्भव  विशेषकर 30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक गुरु व् बाद में शनि वक्री होने के कारण  | वाहन बहुत ध्यान से चलायें, चोट दुर्घटना से बचें |   इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें |

 

सिंह राशि/लग्न  (आपके नाम का शुरू का अक्षर : मा,मी,मू,में,मो,टा,टी,टू,टे)

आप की  कुंडली के ग्याहरवें  घर उच्च राहू आपको अधिक लाभ  देगा व् हर तरह की आय देगा | पांचवें घर में गुरु शनि केतु  आपका पेट खराब करेगें, इलाज कराएँ विशेषकर 30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक जब गुरु व् बाद में शनि वक्री होंगे  | इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु के दान करें |

 

कन्या राशि/लग्न  (आपके नाम का शुरू का अक्षर : टो,पा,पी,पू,ष,ण,ठ,पे,पो)

आप की  कुंडली के दसवें जॉब व् व्यापार के घर  उच्च राहू आपको लालची बनाएगा, आप हर ढंग से आय बढ़ाएंगे | प्रमोशन आदि के योग बनेगे |  (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर गलत कार्य गैर कानूनी कार्य न करें अन्यथा हानि होगी |  चोथे घर में केतु पति/पत्नी का स्वास्थ्य ढीला करेगा | वाहन ध्यान से चलायें  चोट दुर्घटना से बचें |   इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

तुला राशि/लग्न  (आपके नाम का शुरू का अक्षर : रा,री,रु,रे,रो,ता,ती,तू,ते):

आप की  कुंडली के नोवें भाव भाग्य स्थान पर उच्च राहू कार्यों में देरी करेगा | रुकावटें आणि सम्भव हैं यदि गुरु बुध व् शनि कुंडली में पुष्ट न हों | तीसरे  घर में केतु आपको कमजोर करेगा, डर, घबराहट, हिचकिचाना आदि डेढ़ वर्ष रहेगा | (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर  अनावश्यक रूप से न घबराएँ अन्यथा अस्पताल जाना होगा | हार्ट चेक कराते रहें | वाहन ध्यान से चलायें | इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु के दान करें )

 

वृश्चिक राशि :(आपके नाम का शुरू का अक्षर : तो,ना,नी,नू,ने,नो,या,यी,यू)

आप की  कुंडली के आठवें घर में उच्च राहू लाभकारी नहीं होगा  | अकारण खर्चे व् यात्रायें कराएगा | विदेश आप जा चुके हैं, फिर भी विदेश अथवा घर से बहुत दूर जाना होगा |  दूसरे घर में केतु आदि कमजोर करेगा, पति/पत्नी/पुत्र को कष्ट सम्भव | केतु धन लाभ बढ़ा देगा व् इनाम आदि भी मिल सकते हैं   (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनिवक्री होने पर   वाहन बहुत ध्यान से चलायें व् चोट तथा दुर्घटना से जान बचाएं  |   इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

धनु राशि :(आपके नाम का शुरू का अक्षर : ये,यो,भा,भी,भू,धा,फ,ढ,भे):

आप की  कुंडली के सातवें  घर में उच्च राहू लाभकारी है भी व् नहीं भी  | पति पत्नी में तकरार, अलग होना व् यदि शुक्र कुंडली में अच्छा नहीं है तो डाइवोर्स सम्भव | आय कई ढंग से होगी | लग्न में केतु बुखार, चोट आदि मार  सकता है, चेहरा खराब कर सकता है | गुरु शुभ की दृष्टि पड़ने पर धन लाभ व् इनाम आदि मिलने के योग होंगे (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर निर्णय सही लें, वाहन बहुत ध्यान से चलायें व् चोट तथा दुर्घटना से जान बचाएं  |   इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

मकर राशि/लग्न :(आपके नाम का शुरू का अक्षर:  भो,ज,जा,जी,जे,जो,खा,खी,खु,खे,खो,गा,गी)

आप की  कुंडली के छ्टे घर, बुध के घर में उच्च राहू लाभकारी रहेगा | आप निडर होकर अपने कार्य व्यापार आदि सम्पन्न करेंगे | आय तो बुध की स्थिति अनुसार बढ़ेगी परन्तु खर्चे की अधिकता भी सम्भव है | बहन बुआ से अनावश्यक बहस न करें |  बाहरवें घर, मोक्ष के घर में केतु मोक्ष दिलाने में सहायता करता है | चलित में बाहरवें घर शनि व् गुरु भी हैं |(30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर चोट तथा दुर्घटना से जान बचाएं |   वाहन बहुत ध्यान से चलायें |  बुखार, चोट आदि  से बचाव करें | इस  दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

कुम्भ राशि/लग्न  (आपके नाम का शुरू का अक्षर : गु,गे,गो,सा,सी,सु,से,सो,दा)

आप की  कुंडली के पांचवें घर, शत्रु सूर्य के घर उच्च राहू आई टी तथा कंप्यूटर साइंस में विद्वान् बना देगा | पेट की खराबी सम्भव | शेष विद्या –शिक्षा में रुकावट या कमी कर सकता है | पिता को कष्ट सम्भव | ग्यारहवें घर आय स्थान पर केतु धन वृद्धि करेगा, पारितोषिक/इनाम आदि मिल सकते हैं |  चलित में ग्याहरवें घर पर शनि व् गुरु भी हैं | कुंडली में ये दोनों मार्गी व् उदय होंगे तो धन वर्षा | कोई एक वक्री या अस्त होगा तो धन लाभ कम | (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर इस दौरान आय में कमी व् पेट खराबी आदि सम्भव  |    इस  दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु  के दान करें )

 

मीन राशि/लग्न  (आपके नाम का शुरू का अक्षर : दी,दू,थ,झ,दे,दो,चा,चि)

आप की  कुंडली के चौथे घर, चन्द्रमा/शैया सुख स्थान पर राहू हानिकारक नहीं हैं | तब भी,  चन्द्रमा को मजबूत करें चांदी आदि का प्रयोग करके व् चन्द्रमा सम्बन्धी दान उपाय आदि करके | कुंडली में यदि शनि जन्म से वक्री है तो विवाहित जीवन में थोड़ी खटास सम्भव राहू चौथे होने के कारण | दसवें घर, शनि के घर, कार्य-जॉब-व्यापार स्थान पर केतु लाभकारी ही रहेगा | आय वृद्धि व् मान सम्मान में वृद्धि | पारितोषिक/इनाम आदि मिलने की सम्भावना |  (30 अप्रैल से 18 सितम्बर तक धनु राशि पर गुरु व् बाद में शनि वक्री होने पर इस दौरान जॉब में तनातनी-कहासुनी व् लिखत-पढ्त सम्भव | इस दौरान शनि, गुरु राहू व् केतु के दान करें )

 

उपाय

  • माता सरस्वती की पूजा अराधना करते रहें | ॐ नमः शिवाय का दैनिक पाठ बहुत बचाव करेगा |

  • सिलोनी गोमेद 10-15 रत्ती (हाथी का बाल साथ चिपकवा कर) चांदी में सबसे बड़ी ऊँगली में शनिवार या बुधवार गोधूली समय पहनें |

  • हर शनिवार या बुधवार गोधूली समय शनि मूर्ति या शिवलिंग के पास रखें : एक खाने वाला नारियल, काले तिल, 3 मूली पत्ते सहित व् 11 रूपये |

  • राहू व् केतु  के अन्य उपाय इसी वेबसाइट पर/नेट पर देखें व् उचित व् सम्भव उपाय करें | राहू केतु के राशि बदलने पर हानिकारक स्थान पर आने के कारण या राहू/केतु की नकारात्मक दशा चलने पर राहू/केतु के निरंतर उपाय जरूरी होंगे |  

शुभकामनाएं |