प्यार के लिए भी शनि चाहिए
प्रिय पाठको, प्यार करना या होना कोई नई बात नहीं है या आजकल की बात नहीं हैं | प्यार या प्यार का आकर्षण, मानव के जन्म से पहले, देवी देवताओं में भी होता था | इसके लिए सहमति से विवाह हो जाता था, अपहरण भी किये जाते थे, गन्धर्व विवाह भी होते थे आदि आदि |
जन्म कुन्डली में विवाह के लिए लव अफेयर्स यानि प्रेम सम्बन्धों के लिए कोनसा ग्रह देखा जाये | सामान्यत शुक्र ग्रह को देख कर अंदाज़ा लगाया जाता रहा हैं | परन्तु सूर्य भी प्रेम करता हैं चंद्रमा से व् शुक्र से भी | सिंह की तरह सम्बन्ध बनाये, सन्तान हो न हो, आगे बढ़ गये | चंद्रमा तो अपनी और आकर्षित करता हैं और भावुक बनाकर सम्बन्ध बनाता या बनवाता हैं कलंक लगाने में भी देर नहीं करता | तब भी, अच्छे शारीरिक सम्बन्धो, पति पत्नी सम्बन्धों को बनाये रखने के लिए चन्द्रमा व् शुक्र का अच्छा होना जरूरी हैं |
मंगल ग्रह पवित्र वैवाहिक बंधन व् अच्छे सम्बन्ध के लिए 28 वें वर्ष में पूर्ण योग दान देता हैं | बुध ग्रह स्वतन्त्र व् स्वछन्द जीवन जीता हैं और राहू या शनि या शुक्र बल्कि गुरु व् चन्द्र की संगती में आते ही प्रेम सम्बन्धों में पड़ जाता हैं | सम्बन्धों की सीमाओं का ध्यान रहे चाहे न रहे | आजकल रिलेशनशिप की नई तकनीक इन ग्रहों की ही कृपा हैं |
गुरु तो विवाह या प्रेम सम्बन्धों में कोई कमी नहीं आने देता, गुरु चाहता यह हैं कि जहाँ तक हो सम्बन्ध पवित्र बन्धन के हों, वैवाहिक हों | गुरु व् चंद्रमा इकठे होने पर तो अपने समय आने पर प्रेम सम्बन्ध व् शरीरिक सुख होने को कोई टाल ही नहीं सकता | शुक्र देव चंद्रमा, बुध, गुरु व् शनि के सम्पर्क में आकर प्रेम सम्बन्ध अवश्यमेव करा देते हैं |
शनि देव शुक्र को प्यार करते हैं | अत:, शनि व् शुक्र इकठा होने पर प्यार व् विवाह होंता ही हैं | यदि शुक्र जन्म से वक्री हो व् शनि उसके पास से गुजरे तो शुगर की बिमारी मिलती हैं तथा प्राइवेट पार्ट्स सम्बन्धी रोग होते हैं |
शनि देव तीसरे, चौथे, पांचवें , छ्टे, सातवें, नोवें, दसवें, ग्यारहवें व् बाहरवें घर जब जाते हैं तो प्रेम सम्बन्ध होते हैं, विवाह हो चूका हो तो व्वैवाहिक सम्बन्ध प्रगाढ़ हो जाते हैं, जोड़ा सेक्स अधिक करता हैं | यदि शनि जन्म से वक्री नहीं हैं तो तीसरे, चौथे, छ्टे, सातवें, दसवें व् बाहरवें घरों में आने पर प्रेम सम्बन्ध कराता हैं जबकि चौथे, पांचवें , छ्टे, सातवें, दसवें, ग्यारहवें व् बाहरवें में अन्य मित्र व् सहयोगी ग्रह मिलने पर शारीरिक सम्बन्ध बनने भी निश्चित होते हैं |
वक्री शनि, जब जन्म से हो, तो पहले, चौथे, सातवें, दसवें या बाहरवें घर पर चलित में आकर साथी की - पति / पत्नी की मृत्यु करता हैं या मृत्यु तुल्य कष्ट देता हैं या पति / पत्नी घर छोड़ कर चले जाते हैं या तलाक अर्थात सम्बन्ध विच्छेद करा देता हैं | इसी तरह जन्म से अन्य वक्री ग्रह भी सम्बन्ध विच्छेद करा देते हैं |
वक्री ग्रह योग होने पर प्रेम सम्बन्ध या शारीरिक सम्बन्ध कम होते देखे गये हैं | एकतरफा प्यार ऐसी स्थिति में होना आम बात हैं जहाँ लड़के या लड़की को पता ही नहीं होता कि उससे कोई प्यार कर रहा हैं |
राहू शुक्र के साथ मिलकर शारीरिक सम्बन्ध तो बना देता हैं परन्तु कभी कभी विष या विषेली चीज़ खाने से भयंकर परिणाम दिखा देता हैं | केतु गुरु से मिलकर अनेतिक व् अप्राकृतिक सम्बन्ध बना देता हैं | प्राय अन्य ग्रहों से मिलकर केतु अलगाव पैदा करता हैं |
आदमी सोचता हैं कि उसने यह अच्छा किया या बुरा किया | परन्तु ग्रहों के प्रभाव भी कोई चीज़ होते हैं | इसका मतलब यह नहीं की गलत करो व् ग्रहों के नाम पाप या दोष मढ़ दो | इश्वर ने बुधि भी दी हैं सही व् गलत को देखने, परखने, समझने व् ठीक रास्ते पर चलने की |
प्राय पाठक शनि देव के क्रोधी व् खतरनाक रूप को ही देखते हैं परन्तु शनि प्रेम भी करवाते हैं, सम्बन्ध भी बनवाते हैं, रसिक भी हैं व् अन्य जिस ग्रह पर पहुंचते हैं उसके अनुसार एक से अधिक सम्बन्ध भी बनवा देते हैं | पाठकों को सावधान भी रहना चाहिए, सामाजिक व् नैतिक भी | जय शनिदेव |