20 अप्रैल, 2023

जय शनि देव

शनि ग्रह का आप पर शुभाशुभ प्रभाव

(नोट: नमस्कार | जो व्यक्ति नास्तिक हों या सनातन धर्म की बजाय  किसी और धर्म /सम्प्रदाय आदि को मानते हों अथवा भारतीय वैदिक ज्योतिष को ना मानते हों, वे सभी कृपया इस लेख को पढ़ लें | यदि  इससे कोई लाभ उठा सकते हैं तो शुभ है अन्यथा मात्र ज्ञान प्राप्ति के लिए चाहें तो पढ़ें |  इस लेख सम्बन्धी आपके सुझाव या आलोचना आदि का  स्वागत रहेगा | ज्योतिष का ज्ञान रखने वाले विद्वान  उपरोक्त लेख में कमियां लिखें तो मैं अपने ज्ञान वृद्धि के लिए उनका धन्यवादी होऊंगा | आलोचना करते हुए अपना तर्क अवश्य दें | केवल आलोचना के लिए आलोचना की आवश्यकता नहीं है | अकारण या नास्तिक होने पर अज्ञानी की तरह टिप्पणी करने से क्या लाभ ?  संक्षेप में शनि देव के बारे में पाठकों के लिए सामान्य जानकारी देने का एक सार्थक प्रयास किया है, कृपया इसको सराहें | )

        सूर्य देव की दूसरी पत्नी से शनिदेव का जन्म हुआ | सूर्य शनि के पिता हैं | उस समय की परिस्थितियों के कारण शनि की माता ने शुरू के कई वर्षों तक शनि को सूर्य के प्रकाश से छुपा कर रखा | तो बचपन से ही, शनि को अँधेरा व् अकेले रहने की आदत पड़ गयी और  फिर सदैव अकेलापन ही पसंद करने लगे |  विवाह होने पर भी शनि पत्नी की ओर आकर्षित ना हुए और इसलिए पत्नी ने शनि को  पत्नी-सुख के आभाव का श्राप दिया | शनि एक तपस्वी भी हैं व् भगवान शिव के  विशेष कृपा-पात्र हैं  | 

        जिस प्रकार लाखों करोड़ों मील दूर से सूर्य  व् चन्द्र का  पृथ्वी, मनुष्यों, जीवों, वनस्पति व् मौसम  आदि पर पूर्ण प्रभाव दीखता व् अनुभव होता है, इसी प्रकार मंगल, बुध , गुरु बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहू, केतु, प्लूटो, नेपच्युन व् यूरेनस – जो आकाश में बहुत बहुत दूर हैं – इनके प्रभाव भी पृथ्वी, मनुष्यों, जीवों, वनस्पति व् मौसम  आदि पर निरंतर पड़ता है | जिन लोगों को इसका पूर्ण ज्ञान है, वे इसका दिन प्रतिदिन अनुभव करते हैं  व् जो इस विषय व् इन ग्रह आदि का विचार नहीं करते वे अपना सामान्य जीवन जीते ही हैं | परन्तु , सारे संसार के सारे व्यक्ति इन ग्रहों व्  नक्षत्रों /तारों के प्रभाव से मुक्त नहीं हैं, चाहे वे नाम के आधार पर प्रभावित हों या भारत में भारतीय वैदिक संस्कृति अनुसार जन्म राशि के आधार पर प्रभावित हों, हर हाल में विश्व का हर व्यक्ति इन ग्रहों आदि से शत प्रतिशत प्रभावित है | विदेशों में प्लूटो, यूरेनस व् नेपच्युन को अधिक महत्ता  दी जाती है  जबकि ये  ग्रह अन्य ग्रहों के मुकाबले बहुत बहुत दूर हैं | जबकि भारत में शेष ग्रहों के प्रभाव को मुख्यत: माना जाता है | एक राशि में सवा दो दिन रहने वाला चन्द्रमा – किसी भी  राशि पर एक महीने (28 दिन) में एक बार आकर शुभाशुभ प्रभाव  स्पष्टतया  दिखा देता है |

        इस प्रकार 1.2 बिलियन किलोमीटर से भी अधिक  दूर शनिदेव उपर आसमान में विराजमान हैं व् वहीँ से अपना शुभाशुभ प्रभाव हर व्यक्ति को बहुत अच्छी तरह अनुभव करा देते हैं  | ईश्वर के दर्शन हों या ना हों, शनि प्रभाव स्पष्टतया व्यक्ति अनुभव करता है | त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु व् महेश) ईश्वर हैं व् उनके द्वारा चलाये जा रहे संसार के सिस्टम  को ये नौ ग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु बृहस्पति, शुक्र, शनि तथा  छाया ग्रह राहू व् केतु)  चलाते  हैं | ब्रह्मा या विष्णु या शिव की पूजा-स्तुति करने से कर्म-फल सम्बन्धी कष्ट  न्यून ही कम होंगे  जबकि सम्बन्धित ग्रह के दान पूजा स्तुति उपाय आदि से थोड़ा लिहाज़ हो जाता है |  

        शनि एक राशि पर लगभग ढाई वर्ष रहते हैं | शनि न्याय देने वाला ग्रह है | वकील, जज, आई इ एस   शनि कृपा से बनते हैं व् शनि से हर पल प्रभावित होते हैं | केंद्र सरकार की सेवाएं शनि से सम्बन्धित हैं | अंग्रेजी विषय व्   आइल्स के लिए नीलम पहन कर श्रेष्टता मिलती है |

         किसी भी व्यक्ति के अच्छे व् बुरे कर्मों का लेखा जोखा तो उपर चित्रगुप्त रखते हैं परन्तु पीछे भूतकाल व् पिछले जन्म से चली आ रही बैलेंस-शीट के आधार पर शनिदेव शुभ लाभ, मान सम्मान, स्मृद्धि, राज दरबार, उच्चतर व् उच्चतम पद,  हानि, बीमारी, कष्ट, धन हानि, चोरी ,परिवार में हानि व् दुर्घटना आदि प्रदान करते हैं |

            यों तो शनि जन्म कुंडली के बारह घरों में से किसी एक घर में ही बैठते हैं, तब भी शनि  कुंडली के 7 से 9  घरों को हर समय देखते ही हैं | जैसे कि: जिस घर में बैठे हैं, वहां से 3,7,10 वें घर को देखते हैं, मकर और  कुम्भ राशियाँ इनकी होने से ये दो घर भी प्रभावित होते हैं |  शनि साढ़ेसाती में जैसे शनि चन्द्र से पहले की राशि पर – फिर चन्द्र के साथ व् अंत में चन्द्र के बाद अगली राशि पर – अर्थात तीन घरों को निरंतर प्रभावित किये होते हैं  -  तो इस तरह शनि 7 से 9 घरों को प्रभावित करते रहते हैं | इनकी दृष्टि मात्र से या  मिलन होने पर शेष  ग्रहों के फल पर  शनि का  शुभ या अशुभ प्रभाव पड़ता है |

       वस्तुत: शनि व्यक्ति को सत्य – यथार्थ का ज्ञान करा देते हैं व् व्यक्ति को सही रास्ते लाने का प्रयास करते हैं, तब भी यदि अन्य ग्रह अशुभ हो तो फिर शनि उसकी अशुभता को बढ़ा देते हैं  | नशा करना (शुक्र –राहू ), चोरी करना (शनि नकारात्मक), भाई को मारना (मंगल अशुभ), बहन का हक छीनना (बुध अशुभ), पत्नी/पति विछोह (शुक्र – चन्द्र), पिता से बैर (सूर्य शनि)  व्  पुत्र कष्ट (गुरु अशुभ) आदि आदि ग्रहों से जब शनि मिलता है तो उन नकारात्मक ग्रहों का प्रभाव बढ़ा देता है | तिस पर भी, एक बार एकांत में शनि व् जन्म राशि स्वामी ग्रह व्यक्ति की आत्मा को जगता है, झिंझोड़ता है |  

         शनि बुरा नहीं है, इस तथ्य को समझना बहुत जरूरी है | शनि एक राशि पर ढाई वर्ष रहता है |  जिस राशि  (या राशि + ग्रह ) पर जब शनि राशि बदल कर जाता है, उस राशि के स्वामी (सूर्य,चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु बृहस्पति या  शुक्र अथवा शुभ /अशुभ राहू केतु ) यदि जन्म समय से ही नीच राशि में  हों या या वक्री हों या  जन्म से ही कुंडली के 2,6,8 या 12 वें घर में हों तो शनि उस ग्रह की नकारात्मकता को बढ़ा देता है व् उस राशि–स्वामी से मिलकर या उसी की तरह हानि आदि करता है | जब शनि जिस राशि में जाता है या दूसरे ग्रह को मिलता है तो राशि-स्वामी/ग्रह सकारात्मक होने पर, शनि बहुत अच्छे लाभ सुख सुविधाएँ धन धान्य आदि देता हैं | उदाहरण के लिए : यदि जन्म कुंडली में जन्म समय से ही  मंगल स्वराशि मेष या वृश्चिक में या मकर में उच्च  है तथा सही लाभकारी घर में है तथा  शनि भी मार्गी है, तो शनि  जब मंगल पर आएगा तो प्रॉपर्टी, विवाह, अफेयर्स, सन्तान, अच्छे स्टेटस की नौकरी  व् प्रमोशन आदि देगा | और, यदि मंगल कर्क राशी में नीच, या अस्त, या वक्री  या बाहरवें घर है तब शनि मंगल पर आकर कर्ज़ा चढ़ाएगा, प्रॉपर्टी  बिकवा देगा,विवाह (यदि मंगलीक हों) व् जॉब  व्यापार आदि में  हानि करेगा |

        अपनी ही राशि मकर में शनि आकर अत्यधिक कार्य मेहनत करवाता है व् जातक का तेल निकाल देता है जबकि यही शनि अपनी ही प्रिय  राशि कुम्भ में आकर कुम्भ/घड़े  की तरह सब धन, ऐश्वर्य, सुख सुविधाएँ, प्रॉपर्टी, प्रमोशन व् समृद्धि आदि सब कुछ देता है यदि जन्म से वक्री ना हो |

        आइये, शनि के मित्र और शत्रु भी जान  लेते  हैं  |

        शनि की शत्रु राशि : मेष राशि | जिन व्यक्तियों का नाम  चू,चे,चो,ला,ली,लू,ले,लो,अ, आ से शुरू होता है, उनका शनि शत्रु ही समझें | मेष राशि स्वामी मंगल कुंडली में यदि मज़बूत है तो बचाव है, अन्यथा बीमारियाँ, कष्ट व् हानि होती ही हैं  |

  • शनि कब कब मेष राशि में नीच/हानिकारक  था / भविष्य में होगा :

(28-4-1939 से 19-6-1941, 8-3-1969 से 28-4-1971 तक, 18-4-1998 से 7-6-2000, 24-2-2028 से 9-8-2029, 8-1-2057 से 28-5-2059, 21-5-2086 से 17-7-2088)

       शनि की मित्र  राशि :  तुला राशि | जिन व्यक्तियों का नाम  रा,री,रु,रे,रो,ता,ती,तू,ते से शुरू होता है, उनका शनि मित्र होता है | तुला राशि स्वामी शुक्र कुंडली में सही/अच्छी स्थिति में होना जरूरी है | यदि जन्म से शनि अस्त/नीच राशि मेष का /वक्री है तो शुक्र सही होते हुए भी शनि शूगर, प्राइवेट पार्ट्स सम्बन्धी रोग व् पति/पत्नी का विछोह करा देता है |

        शनि की अपनी राशि मकर में : जिन व्यक्तियों का नाम  भो,ज,जा,जी,जे,जो,खा,खी,खु,खे,खो,गा,गी से शुरू होता है वे लोग शनि- प्रभावित होते है, उनकी  आदतें शनि से मिलती हैं तथा ये लोग सारी उम्र (व् विशेषकर जीवन  के 30 वें वर्ष तथा शनि की विमशोत्तरी दशा में) कोल्हू के बैल की तरह काम करते हैं | इस वर्ष व्यक्ति का भाग्योदय होता है |  जीवन मेहनत भरा, सेल्फ–मेड व् कष्टों आदि से भरा होता है | यदि जन्म से शनि अस्त या वक्री है तो भूखे तपस्वी का सा जीवन व्यतीत होता है |

       शनि अपनी मनपसन्द राशि कुम्भ में : जिन व्यक्तियों का नाम गु,गे,गो,सा,सी,सु,से,सो,दा से शुरू होता है वे लोग शनि प्रभावित होते है | यदि जन्म से शनि मार्गी है व्  अस्त नहीं है तो कुम्भ राशि पर शनि आकर (अप्रैल 2022 से मार्च 2025 तक  शनि कुम्भ राशि पर ही है) सर्व सुख,  स्मृद्धि, धन धान्य, जॉब व्यापार वृद्धि , प्रमोशन, घर वाहन आदि सब कुछ दे देता है | यदि जन्म से शनि अस्त या वक्री है तो उपरोक्त लाभ न्यून हो जाते हैं  |

12 राशियों  के  स्वामियों से शनि की मित्रता व् शत्रुता

शनि मेष राशि  का शत्रु (लाभ दे देता है यदि मंगल मज़बूत हो)

 शनि वृष  का मित्र (शुक्र मजबूत होने पर विशेष लाभकारी)

 शनि मिथुन का मित्र/सम (बुध  मजबूत होने पर विशेष लाभकारी)

 शनि कर्क का शत्रु (यद्यपि पुष्य नक्षत्र भी कर्क राशी में ही हैं व् पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि ही है-शनि कर्क राशी के स्वामी  चन्द्र का शत्रु है)

 शनि सिंह को लाभकारी (परन्तु शत्रु भी क्योंकि सिंह राशि के स्वामी व् अपने पिता सूर्य से शनि की नहीं बनती – शनि सिंह पर आकर हार्ट सम्बन्धी समस्या भी दे देता है)

शनि कन्या का मित्र/सम (बुध  मजबूत होने पर विशेष लाभकारी)

शनि तुला का अभीष्ट मित्र (शुक्र मजबूत होने पर विशेष लाभकारी)

शनि वृश्चिक को लाभकारी (मंगल  मजबूत होने पर विशेष लाभकारी)

शनि धनु को लाभकारी (गुरु बृहस्पति  मजबूत होने पर विशेष लाभकारी)

शनि मकर को मेहनतकश व् अन्तत: लाभकारी (यदि जन्म से शनि वक्री/अस्त  ना हो)

शनि कुम्भ को सुख सम्पन्न व् लाभकारी (शनि मार्गी हो , अस्त या वक्री ना हो)

शनि मीन को लाभकारी  ( शनि साढ़ेसाती में तीनों चरणों में कष्टकारी परन्तु  गुरु बृहस्पति मजबूत होने पर विशेष लाभकारी |

                                     

शनि साढ़ेसाती कैसे शुरु होती है ? :

कई  व्यक्ति प्राय: जानते ही नहीं कि शनि की कोई साढ़ेसाती भी होती है |  साढ़ेसाती क्या होती हैं, क्यों होती हैं, क्या सब राशियों पर साढ़ेसाती समान हानि लाभ देती है आदि आदि प्रश्नों के उत्तर बहुत से जिज्ञासु जानना चाहते हैं | 

शनि एक राशि पर ढाई वर्ष रहते हैं |

  • शनि साढ़ेसाती का प्रथम चरण : चन्द्र राशि (यदि आपको अपने जन्म की  तारीख आदि नहीं पता तो आपके प्रसिद्ध  नाम)  से पहली राशि पर शनि आने पर शनि साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाता है | यहाँ शनि ढाई वर्ष रहता है |
  • शनि साढ़ेसाती का द्वितीय चरण : जन्म राशि /चन्द्र राशि (जिनकी कुंडली आदि नहीं है तो उनकी प्रसिद्ध नाम राशि) पर शनि आने पर शनि साढ़ेसाती का दूसरा चरण होता है  | इन        ढाई वर्षों में साढ़ेसाती चरम सीमा पर होती है |
  • शनि साढ़ेसाती का तृतीय चरण :  इसके बाद, फिर शनि राशि परिवर्तन करके  चन्द्र राशि से अगली राशि पर जाने पर साढ़ेसाती का तीसरा चरण होता है |     इसकी अवधि समाप्त होने पर, शनि साढ़ेसाती समाप्त हो जाती है | इस तरह लगभग    साढ़े सात-आठ वर्ष लग जाते हैं क्योंकि हर वर्ष शनि 140 दिन वक्री भी चलता है |
  • जिन लोगों का जन्म कुंडली में यदि जन्म से ही शनि  वक्री व्/या नीच राशि मेष का है तो उन जातकों को शनि-प्रदत्त लाभ नगण्य मिलते  हैं  |
  • अलग अलग राशियों पर पहले ढाई वर्ष, अगले ढाई वर्ष व् अंतिम ढाई वर्ष में अलग अलग शुभ व् अशुभ साढ़ेसाती के प्रभाव होते हैं, सभी राशियों पर एक जैसा समान प्रभाव नहीं होता |  निम्न विवरण से यह स्पष्ट किया जा रहा है :

राशि               साढ़ेसाती का        साढ़ेसाती का               साढ़ेसाती का

              प्रथम चरण           द्वितीय चरण         तृतीय  चरण

मेष            शुभ                           अशुभ/मंदा                 शुभ

वृष            अशुभ                        शुभ                   शुभ

मिथुन        शुभ                           शुभ                   अशुभ

कर्क          शुभ                           अशुभ                        शुभ

सिंह          अशुभ                                अशुभ                        शुभ

कन्या                 अशुभ                                अशुभ                        शुभ

तुला          शुभ                           शुभ                   अशुभ

वृश्चिक        शुभ                           अशुभ                        अशुभ

धनु            अशुभ                                शुभ                   शुभ

मकर                 अशुभ                                अशुभ                        शुभ

कुम्भ         अशुभ                                शुभ                   अशुभ

मीन           अशुभ                                अशुभ                        अशुभ

 

(नोट:जन्म कुंडली  देखकर उपरोक्त नियम में बदलाव देखने को मिलता है |)

अभी मकर, कुम्भ व् मीन  राशियों पर शनि साढ़ेसाती  चल रही है |

 

शनि का ढईया :

शनि जिस राशि पर गोचर में चल रहा हो, उस राशि से छटी राशी व् दसवीं राशि पर शनि का ढईया  चलता है | ढाई वर्ष  की इस अवधि में शुभ–अशुभ प्रभाव सम्बन्धित राशियों को मिलत हैं | वर्तमान में   कर्क व्  वृश्चिक  राशियों पर  ढईया चल रहा है  |

        यदि  किसी को जन्म समय शनि  ग्रह या अन्य ग्रहों की स्थिति नहीं पता  तो वे गूगल से फ्री कुंडली में अपना विवरण भर कर जन्म कुंडली बना लें | ग्रहों के आगे उदय /अस्त/मार्गी/वक्री /नीच आदि लिखा मिलेगा |

        यह मानकर चलें कि शनि ग्रह हमें सही मार्गदर्शन देने व् हमारी कमियां दूर करने का अवसर देता है| कष्ट, चोट, बीमारी, दुर्घटना आदि सब पूर्व-निश्चित हैं जो हमारी लापरवाही के साथ साथ पहले कर्मों के परिणाम स्वरूप मिलते हैं | अचानक ही धन सोना मिलना व् अचानक ही दुर्घटना होना – ईश्वरीय सिस्टम में पूर्व-निश्चित ही हैं | ज्योतिष दृष्टि यह सब देख लेती है | अत: शनिदेव से डरने की बजाये, उन्हें नमस्कार कर उनकी कृपा-दृष्टि प्राप्त करें | तब भी, शनि देव की कुदृष्टि से बचने के लिए व् कष्ट आदि से बचने के लिए, नीचे उपाय दिए जा रहे हैं , उचित व् सम्भव उपाय किये जा सकते हैं :

 

     शनि शांति  के उपाय:   व्यक्ति की आयु  के 30-31 तथा 36-37  वें वर्षों  तथा जब        शनि की विंशोत्तरी दशा चल रही हो, उस समय ये उपाय अवश्य करें | वैसे भी, हर रोज़ सम्भव उपाय किये जा सकते हैं |

     (नोट: उपाय नम्बर 1 व् 2 के बाद केवल सम्भव उपाय करें, सभी उपाए न करें )

 

  1. सिलोनी नीलम 6-7 + रत्ती पहनें चांदी/सोने में मिडिल फिंगर पुरुष दायें व् स्त्रियां बाएं हाथ,  शनिवार सांय  आठ बार  शनि मंत्र या “जय शनिदेव” बोलकर पहन लें  | ध्यान रहे, शनि ग्रह उन दिनों वक्री ना चल रहा हो |
  2. हर शनिवार : साबत माह/उड़द 500 ग्राम+ एक बंद शीशी  तेल सरसों + कोई फल+काले तिल + 3 मूली पत्ते सहित  + 1 भूरा पानी वाला खाने वाला नारियल + 21 रूपये  शनि मूर्ति या शिवलिंग पर अर्पित करें |
  3. शनि मन्त्र  “ॐ प्रा प्रीं प्रों सः शनये नमः”   हर रोज़ जपें | शनि चालीसा / शनि स्तोत्र/ शनि की आरती  हर रोज़ पढ़ें/ या मोबाइल पर सुनें |
  4. हर शनिवार गरीबों को चाय-पकोड़े खिलाएं-पिलायें या भोजन कराएँ |
  5. शनिदेव के गुरु भैरव नाथ जी को भोजन आदि भैरों मन्दिर में दें |
  6. मजदूरों/गरीबों का मेहनताना पूरा दें, उन्हें तंग न करें व् उनके कल्याण के कार्य करें |
  7. घर की पुरानी अनावश्यक चीजें, पुराना लोहा, कचरा आदि शनिवार के दिन घर से निकाला करें |
  8. हर महीने नया झाड़ू खरीद कर शनि मन्दिर में रख आयें | काले नये चमड़े के जूते एक जोड़ी खरीद कर दान करें |
  9. लोहे के 3 तसले शनिवार के दिन मन्दिर/धर्म स्थान में रख आयें | धर्म स्थान में लोहे का दान करें |
  10. सूर्योदय  के पश्चात जमीन पर सरसों का तेल या  शराब 43 दिन डाल दिया करें |
  11. कुत्तों व् कव्वों को सरसों तेल लगी रोटी 43 दिन डालें | गायों को 43 दिन लगातार भोजन दें |
  12. सुरमा जमीं में दबाएँ |
  13. मछलियों को आटे की गोलियां एक ही दिन में 100 अलग अलग पास पास के स्थानों पर शनिवार के दिन खिलाएं |
  14. शनिवार का व्रत करें |

(शनि के वक्र काल के दौरान  अति आवश्यक होने पर, टेस्ट करके, नीलम पहने अन्यथा थोड़ा रुक कर मार्गी शनि के समय पहनें )

विनय :

  • यदि आप (1) अपनी समस्या व्यक्तिगत रूप से पूछना चाहते हों (2)  आप अपना या अपने व्यवसाय का मासिक व्/या वार्षिक फल लिखित में मंगाना चाहते हों (3)  जन्म से सारी उम्र का लिखित फलादेश, विशेष वर्षों में लाभ हानि आदि व् हर स्थिति के लिए उपायों सहित बनवाना चाहते हों  तो आप व्हट्स एप्प 9876042656 पर अपना विवरण (नाम, जन्म की  तारीख, समय व् स्थान-जिला)  व् प्रश्न  भेजें जिनका उत्तर आपको प्राप्त होगा, बताये गये मानदेय देने के बाद |
  • अपना भविष्य स्वयम जानने/लिखने के लिए panditjksharma.com  पर  “अकाट्य वैदिक ज्योतिष” “You cannot challenge Indian Vaidic Astrology” लेख  अवश्य पढ़ें

 

        आप सभी के लिए शुभकामनाएं |  जय शनिदेव |  जय श्री लक्ष्मी नारायण जी की|